*पखांजूर से बिप्लब कुण्डू(13.4.21)*
तहसीलदार को देखकर भागा सहायक आरक्षक, नदी के तट पर बैठकर कर रहा था रेत की एंट्री ।

पखांजुर राजश्व अमला का कोटरी नदी पर दबिश।अवैध रूप से रेत खनन और अवैध रूप से हो रही थी वशूली।
पखांजूर–
ग्राम परतापुर में पुलिस के संरक्षण में हो रेत के अवैध उत्खनन के मामले में आज जब पखांजुर प्रशासन के दल ने छापा मारा तो पुलिस का सहायक आरक्षक नदी के घाट में अवैध पैसे की वसूली करता मिला।जवान नदी के घाट के पास अपनी स्कूटी और हिसाब का रजिस्टर लेकर रेत ले जा रहे टैक्टरों की एंट्री कर रहा था ।साथ ही पैसे का भी हिसाब रख रहा था।पर प्रशासन के दल ने जब उसे रंगे हाथ पकड़ा तो वह अपनी स्कूटी में प्रशासन के दल को चकमा देकर भाग गया ।दल ने करीब दो घंटे मस्ककत के बाद भी प्रशासन के अधिकारी उक्त जवान को नहीं पकड़ पाऐ।बताया जा रहा है कि उक्त जवान थाना परतापुर में पदस्थ सहायक आरक्षक देवसिंह पोटाई है।जो परतापुर के कोटरी नदी के रेत घाट के उपर ही अपनी स्कूटी में बैठ कर रेत ले जा रहे टैक्टरों का हिसाब किताब कर रहा था।जब प्रशासन का दल पहुंचा और उसके पास रखे वह रजिस्टर को पकड़ लिया इसके बाद जवान ने बड़ी चालाकी से प्रशासन को यह विश्वास दिला दिया की वह वसूली नहीं कर रहा वसूली थोड़ी दूर में दुसरा व्यक्ति कर रहा है और वह उसके पास ले जाऐगा। प्रशासन का दल उसके झांसे में आ गया और वह अपनी स्कूटी में चल पड़ा प्रशासन के अधिकारी अपनी चार पहिया वाहन में उसके पीछे पीछे चल दिऐ जवान अधिकारियों को गांव से बाहर ले आया और तेजी से अपनी स्कूटी मोड़ भाग गया। जिसके बाद प्रशासन के अधिकारी को समझते देर नहीं लगी यह यही जवान बसूली कार्य में लगा है और प्रशासन के दल को चकमा दे दिया है। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी जवान के पीछे लग गऐ वह गांव की गलियों में तो कभी परतापुर गांव से बाहर भाग जाता पर अधिकारी भी उसके पीछे लगे रहे। परतापुर थाना अतिसंवेदन शील होने के कारण जवान की भी मजबूरी थी की वह परतापुर से दूर नहीं भाग पा रहा था और गांव के कभी इस पारा तो कभी उस पारा तक ही भागता रहा। वहीं प्रशासन का दल चार पहिया वाहन में था जिस कारण वह भी उतनी तेजी से उस जवान के पीछे नहीं लग पाया और इसका फायदा उठा जवान प्रशासन के दल को चकमा देने में सफल रहा। करीब दो घंटे की मसक्कत के बाद भी उक्त जवान को नहीं पकड़ पाऐ पर जवान से प्राप्त रजिस्टर में लिखा हिसाब किताब और बसूली की पूरी जानकारी तहसीलदार के दल के हाथ लग गई। प्राप्त रजिस्टर में बकायदा इस कार्य के लिए नियुक्त जवान का नाम पद नाम उसका क्रमांक दर्ज है। चकमा दे रहे जवान की पहचान भी रजिस्टर में दर्ज नाम के जवान के रूप में हुई है।
प्रशासन के अधिकारियों को प्राप्त रजिस्टर में अवैध रेत खनन का कच्चा चिठठा है और इस अवैध बसूली के काम में लगे जवान का पहले पन्ने में नाम लिखा है। जो जवान प्रशासन को चकमा दे कर भाग गया वह जवान की पहचान भी उस रजिस्टर के पहले पन्ने में लिखे जवान के नाम के रूप में ही हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उक्त जवान का इस थाने में बसूली का ही काम है और लम्बे अर्से से वह इस काम में लगा है। प्रशासन के अधिकारी जवान को खोजते हुए जब उसके घर गऐ तो उसकी पत्नी ने भी बताया की उसका काम रेत टैक्टर का हिसाब रखना है।परतापुर थाना में सीमा सुरक्षा बल का कैम्प भी है तो थाने की भी पूरी सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल के पास है गस्त भी इन्ही के जवान करते है जिसमें एक दो जिला पुलिस बल के जवान होेते है। और परतापुर थाने में अपराध भी लगभग शुन्य है, पर कमाई के मामले में जिले के टाॅप थानों में है।पूरा थाना स्टाफ इस अवैध रेत खनन के संरक्षण कार्य में लगा हुआ है।थाने में नदी की दूरी महज दो सौ मीटर दूर है और परलकोट की अधिंकाश रेत इस कोटरी नदी के इस घाट से ही जाती है जिस पर परतापुर थाने का सीधा नियंत्रण है। हर टैक्टर थाने के सामने से ही हो कर गुजरता है एसे में बिना थाने को सेट करे रेत खनन करना संभव नहीं है। वर्तमान में प्रति टैक्टर चार से पांच हजार रूपए की बसूली होती है टैक्टर मालिकों ने बताया की रोजाना सौ टैक्टर से अधिक रेत का खनन होता है और इस काम में क्षेत्र भर के 70 से अधिक टैक्टर लगे है एसे में हर माह यह थाना तीन लाख से अधिक की अवैध कमाई कर रहा है।परतापुर थाने में हो रही रेत खनन का कार्य पुलिस संरक्षण में हो रहा है रोजाना सैकड़ों टैक्टर इस थाने के सामने से ही रेत खनन कर ले जा रहे है पर आज तक परतापुर पुलिस ने एक टैक्टर के खिलाफ भी मामला दर्ज नहीं किया। ग्राम पंचायत परतापुर के सरंपच राजाराम कोमरा ने तो पुलिस पर रेत खनन कराने का सीधी सीधा आरोप लगा दिया है। सरंपच ने कहा की वर्तमान थाना प्रभारी प्रति टैक्टर से चार से पांच हजार रूपए महिना ले रहे है और घाट में जवान बैठा इसकी बसूली करा रहे है ग्रामीण इसका विरोध करते है तो उन्हें नक्सली प्रकरण में फंसा तो कभी 151 के तहत केस बना जेल भेजाने की बात कहा जाात है।
परतापुर में अवैध रेत खनन के मामले में पुलिस की सीधे लिप्तता उजागर हो रही है जिसकी पुष्टी स्वंम प्रशासन के अधिकारी कर रहे है। परतापुर के थाना प्रभारी विसेन पिस्दा से इस संबध में जानकारी ली गई तो उन्होंनें सहायक आरक्षक देवसिंह पोटाई उनके थाने का स्टाफ होना तो स्वीकारा पर अवैध रेत खनन में पुलिस द्वारा बसूली जैसे आरोपो को नकार दिया। पर परतापुर पुलिस थाने के सामने से नदी से रेत ले जा रहे टैक्टर पर परतापुर पुलिस कार्यवाही क्यों नहीं करती इस संबध में कोई जवाब नहीं दे पाऐ।
इस संबध में पखांजूर तहसीलदार शेखर मिश्रा ने बताया की लम्बे अर्से से पुलिस के संरक्षण में रेत के अवैध बसूली की सूचना मिल रही जिस कारण प्रशासन के दल ने बिना पुलिस को कोई सूचना दिऐ यह कार्यवाही की है पर बसूली कर रहा जवान मौके से प्रशासन के दल को चकमा देकर फरार हो गया उक्त जवान के पास से एक रजिस्टर मिला है।जिसमे रेत का पूरा हिसाब किताब दर्ज है। मामले में प्रशासन अपनी ओर से कार्यवाही करेगा।
