सामाजिक विषय -: मान-सम्मान

सामाजिक विषय -: मान-सम्मान

रिश्तों के बीच मान-सम्मान ना हो तो रिश्तों में खटास या दरार पढ़ जाता है । वो चाहे पड़ोस में हो समाज में हो पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका या दोस्तों के बीच हो मान और सम्मान की आवश्यकता दोनों तरफ होती है ।
कभी-कभी इंसान रिश्तों में ये नहीं देखता आपको कोई दिल से चाहता है या फिक्र करता है लेकिन हम उसे नजरअंदाज कर देते है वह इंसान सुबह,शाम,दिन-दोपहर हर वक्त हमारी परवाह भी करता है लेकिन हम ध्यान नहीं देते कोई हमारी इतनी फिक्र भी करता है ।
हम काम में उलझे हुवे रिश्तों में उलझे हुवे कभी ये सोचते नहीं
कोई कदम-कदम पर आपका साथ तो देता है लेकिन हम उसे ठीक से कभी समय नहीं देते ।
दौड़ भाग चली है कभी अपनों को संवारते हुवे कभी खुद को संभालते हुवे आंधी-तूफानों का सामना करते हुवे
आप कितने ही आगे निकलो आपके पीछे कोई तो सहारा बन कर दिन-रात फिक्र में रहते है वो माँ-बाप, भाई- बहन दोस्त या प्रेमी कोई भी हो सकता है ।
हमारे कदम-कदम पर वे साथ देते लेकिन कभी थोड़ा सा वक्त हम ठीक से उन्हे हम नहीं देते। कभी भला-बुरा उसने कह दिया हम दूरियां बनाते आखिर उसने हमें भला बुरा क्यों कहा चूक हमसे कहां हुई और हम कभी अमल या विचार नहीं करते ।
बल्कि नाराज हो जाते और हम उनसे कोसों दूर भागते उल्टा उसे हम अपना दुश्मन समझते सोचो जो इंसान हमारे हर मुश्किलो में कदम-कदम पर साथ था वो कैसे हमारा दुश्मन हो सकता वो हम कभी- कभी ये नहीं समझते प्यार जो करता है हमसे वही डांट सकता है दूसरा भला क्यों हमें डांटेगा कोई अपना ही हमें सताएगा रूलायेग और संभालेगा भी
मान-सम्मान तो जरूरी है लेकिन समय भी दो
अगर मान सम्मान की चाह यदि अपनों से रखते हो तो
नमन 🙏

मौलिक
राम भगत नेगी किन्नौर
हिमाचल प्रदेश
9418232143