सुरेन्द्र मिनोचा
मनेंद्रगढ़/एमसीबी :- डीपफेक वीडियो से अब वैश्विक स्तर पर नामचीन लोगों की छवि को खराब करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। वहीं, सामाजिक मूल्यों का पतन भी हो रहा है। लगातार कुछ विशिष्ट शख्सियतों के डीपफेक वीडियो तेजी से सामने आने लगे हैं। समय रहते इस दुरुपयोग को यदि सख्त कानून के दायरे में लाकर नहीं रोका गया तो , इससे वैश्विक स्तर पर भारत की छवि भी खराब हो सकती है एवं देश के अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी आंच आ सकती है।
आज डीपफेंक वीडियो की असलियत परखने और पहचान करने,उसे रोकने के लिए सरकार की कोई गंभीरता नहीं दिखती। इस फर्जी वीडियो को सोशल मीडिया तक न पहुंचने के लिए अभी किसी नीति का निर्धारण नहीं हुआ है।यह देरी आने वाले समय में भारी पड़ने वाली है। इंटरनेट के आने के बाद इस कृत्रिम मेधा को आखिर हम कब तक एक बड़ी उपलब्धि मानते रहेंगे? अब इसका दुरुपयोग निरंतर चारों तरफ दिख रहा है। डीपफेक में तस्वीरें और वीडियो में मौजूद शख्स का चेहरा इतनी सफाई से बदल दिया जाता है जिससे पहचानना बहुत मुश्किल होता है।अब वीडियो नहीं ऑडियो भी बदल दिए जाते हैं। डीपफेक वीडियो से नामचीन हस्तियों की छवि और सामाजिक प्रतिष्ठा दांव में लगी हुई है।आने वाले समय में देश के सौम्य और समरसता के वातावरण में डीपफेक के कारण होने वाली उथल-पुथल और परेशानियों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने भी जी-20 के वर्चुअल सम्मेलन में चिंता व्यक्त की थी।
अब यह देश का ज्वलंत मुद्दा भी है, सरकार इस पर चिंतन करें और वैश्विक स्तर पर विनियमन की जरूरत समझे। डीपफेक पर अब अंकुश लगाने की लिए सख्त कानून की जरूरत है। सोशल मीडिया के इस दौर में फेंक न्यूज़ और फर्जी वीडियो आखिर कब तक लोगो की निजता में सेंध लगाकर उनकी छवि को खराब करते रहेंगे? इस पर तत्काल अंकुश लगाने के लिए ठोस कानून बनाया जाए, एवं सोशल प्लेटफॉर्म पर आने वाले कंटेंट की निगरानी और जांच के लिए एक नियामक संस्था का गठन किया जाना चाहिए।
