राजिम :— अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन गायत्री शक्तिपीठ राजिम में किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री माता के छायाचित्र पर दीप प्रज्जवलित एवं श्रीफल फोड़कर किया गया.इस अवसर पर गरियाबंद जिले के पांचो विकासखंड के कक्षा पांचवी से बारहवीं तक के प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह श्रीफल, कलम एवं साहित्य भेटकर सम्मान किया गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि चंदूलाल साहू (अध्यक्ष भंडार गृह बीज निगम) ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा भारत की गौरवशाली विरासत और नैतिक मूल्यों में युवाओं की रुचि को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इस परीक्षा का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को भारतीय संस्कृति के समृद्धि इतिहास, परंपराओं और नैतिक मूलयों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करना है. उन्होंने आगे कहा कि पंडित राम शर्मा आचार्य द्वारा लगभग 3200 पुस्तक लिखा गया है. यह परीक्षा न केवल छात्रों की बौद्धिक और नैतिक समझ को मजबूत करती है बल्कि उन्हें अपनी जड़ों की गहराई से जुड़ने में भी मदद करती है. जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर ने कहा कि भारतीय संस्कृति व सभ्यता विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति व सभ्यता है.भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक चेतना, नैतिकता और प्राचीन ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देना है.एच.एल.साहू जिला समन्वयक ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 22 राज्यों के 450 जिलों में 11भाषा में संचालित की जा रही है. भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य एक अच्छे इंसान एवं चरित्र का निर्माण करना है. अतः भारतीय संस्कृति ज्ञान हमें जीवन जीने की कला सिखाती है. श्याम चंद्राकर सांख्यिकीय अधिकारी ने कहा कि संस्कृति किसी भी देश, जाति और समुदाय की आत्मा होती है.संस्कृति से ही हम अपने आदर्शो, जीवन मूल्यों आदि का निर्धारण करते हैं.हेमंत साहू विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि पढ़ाई के साथ संस्कार भी जरुरी है. उन्होंने संस्था प्रमुखों एवं शिक्षकों से कहा कि आने वाले समय में सभी विद्यालय के विद्यार्थी अधिक से अधिक भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में शामिल हो ऐसा हम सभी का प्रयास होना चाहिए. सुभाष शर्मा विकासखंड स्रोत समन्वयक ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमारी पहचान है और इस प्रकार की परीक्षाएं विद्यार्थियों में संस्कार, नैतिकता एवं देशभक्ति की भावना जागृत करती है.आज जिन विद्यार्थियों को सम्मानित किया जा रहा है वे वास्तव में हमारे संस्कारों के वाहक है.कार्यक्रम का संचालन महेंद्र साहू शिक्षक ने किया. कार्यक्रम के अंत में विभिन्न विद्यालयों से आए हुए शिक्षकों एवं पालकों का साहित्य एवं मंत्र लेखन चादर भेंट कर सम्मान किया गया. इस अवसर पर पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर मिश्रा, प्राचार्य रामायण मिश्रा,आलोक शर्मा, नोहर सिंह धीवर, राजेंद्र नाग व्याख्याता अशोक मिश्रा,पूरन लाल साहू, टीकम साहू जिला समन्वयक, टीकम सेन ब्लॉक समन्वयक, संतोष साहू शिक्षक, बसंत साहू, दुर्गावती सिन्हा,तेजराम साहू,चेतन सिन्हा,गिरवर चंद्रवंशी, टीकाराम साहू,परमानंद यादव, जगदीश साहू, मेघ राम साहू,बिहारी निषाद, टोपेश्वरी सिन्हा,मुस्कान साहू,कविता साहू,ऐश्वर्या साहू,दीपा साहू, गीतांजलि साहू,पूरन लाल साहू,केसरी साहू,पवन गुप्ता, श्यामू साहू, विक्रम मेघवानी सीताराम साहू सहित विभिन्न विद्यालय से आए हुए शिक्षक एवं पालक गण उपस्थित थे.
