गरियाबंद जिले में कथित झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम इलाज करता नजर आया, स्वास्थ्य विभाग मौन

गरियाबंद – जिले के भैंसातरा क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा बिना किसी स्पष्ट चिकित्सकीय डिग्री या पंजीकरण के इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार गोविंद साहू नामक व्यक्ति लंबे समय से एक छोटे कमरे में मरीजों को देखकर दवाइयाँ देता हुआ पाया गया है।मौके पर मौजूद तस्वीरों में देखा जा सकता है कि एक साधारण कमरे में इलाज की व्यवस्था की गई है, जहाँ इंजेक्शन, ड्रिप, दवाइयों के बॉक्स, कैंची, कॉटन और अन्य मेडिकल उपकरण खुले तौर पर रखे हुए हैं। दीवार पर टंगी ड्रिप बोतल और बिना किसी मानक चिकित्सा व्यवस्था के उपचार किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज करता है, जबकि किसी प्रकार की MBBS, BAMS या अन्य मान्यता प्राप्त डिग्री का प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया है।ग्रामीण मजबूरी में यहाँ इलाज कराने आते हैं, क्योंकि क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित हैं।

बिना पंजीकरण इलाज – मरीजों की जान से खिलवाड़?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना प्रशिक्षण और पंजीकरण के इलाज करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। गलत इंजेक्शन, गलत दवाइयाँ और संक्रमण का जोखिम हमेशा बना रहता है।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

क्या स्वास्थ्य विभाग को इस गतिविधि की जानकारी नहीं है?

यदि जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या जिले में झोलाछाप इलाज पर कोई नियमित निरीक्षण होता है?

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि:

संबंधित व्यक्ति की शैक्षणिक डिग्री और पंजीकरण की तत्काल जांच की जाए

यदि वह अपात्र पाया जाता है, तो कानूनी कार्रवाई हो

क्षेत्र में सरकारी डॉक्टर या स्वास्थ्य शिविर की व्यवस्था की जाए

यह मामला न केवल भैंसातरा, बल्कि पूरे जिले में झोलाछाप इलाज की सच्चाई को उजागर करता है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस पर कब और क्या कार्रवाई करता है।