प्रमोद दुबे
महासमुंद :- ग्राम पंचायत आमाकोनी में प्रेरक समिति महासमुंद यूनिट द्वारा लघु वनोपज का संरक्षण संवर्धन एवं सामूहिक विपणन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। उक्त प्रशिक्षण का उद्देश्य कार्यक्रम समन्वयक हेमलता राजपूत जी द्वारा बताया गया कि इस कार्यक्रम में कुल 20 गांव से 58 महिलाओं ने भाग लिया, जिसे यह प्रशिक्षण में मुख्य रुप से यह बताया गया कि हम गांवों में रहते हैं जहां प्राकृतिक द्वारा प्रदत्त वनोपज वन संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है जो गांव के आदिवासी परिवार से लेकर सभी अन्य समुदाय के वर्ष भर में लगभग 50 प्रतिशन दिन माह में आय का मुख्य स्रोत है लेकिन कई बार हम अधिक पाने के चक्कर में पूरे पेड़ पौधे को पूरा नष्ट कर डालते हैं जो हमारे प्राकृतिक संसाधन को विनाश कर देती है जिसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में पड़ता है। कार्यक्रम में उपस्थित मास्टर ट्रेनर श्रीमती दीवान जी एवं मनोरंजन जी द्वारा वन अधिकार अधिनियम 2005 द्वारा प्रदत्त अधिकार सामुदायिक वन अधिकार और सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दिया गया कि यह सभी अधिकार कानूनी तौर पर सी एफ आर दावा जमा करने अधिकार लेना और अपने वन संपत्ति का संरक्षण संवर्धन समुदाय द्वारा किया जाना वर्णित है ऐसे में हम सभी का यह कर्तव्य बनता है कि हम प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा करें। कार्यक्रम में उपस्थित प्रेरक समिति प्रमुख रामगुलाल सिन्हा द्वारा लघु वनोपज की कैसे संरक्षण संवर्धन और सामूहिक विपणन व्यवस्था पर कार्य करें इस पर विस्तारपूर्वक जानकारी दिया गया है कि वर्तमान सरकार एवं पूर्व सरकार द्वारा इस सभी पर सरकारी मूल्य भी तय किया गया और लोगों को अलग अलग वन संपदा पर उसका मूल्य दे रहा है। अगली कड़ी में उन्हें बताया गया कि जंगलों से मिलने वाले फलों का समय से पहले तोड़ना मुख्य रुप से आगामी समय पेड़ों के विस्तार को रोकता है क. जैसे आम, चार, भुंईआवला, तेन्दुफल, भेलवा, हर्रा आदि पैसे के लालच में हम फल को पाने के लिये पेड़ को काट डालते हैं।
