शहीद महेंद्र कर्मा पार्क के नामकरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा – राजू रेड्डी 

( नवनिर्मित पार्क में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा की प्रतिमा हो स्थापित )

( महापुरुषों का सम्मान राजनेतिक लाभ हानि के तराजू पर तौलना बंद करें भाजपा )

 किरंदुल — किरंदुल नगर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व सांसद प्रतिनिधि आर राजू रेड्डी ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि किरंदुल नगर में कांग्रेस शासनकाल के दौरान दंतेवाड़ा जिले के कद्दावर जननेता एवं “बस्तर टाइगर” के नाम से विख्यात स्वर्गीय शहीद महेंद्र कर्मा जी की स्मृति में शहीद महेंद्र कर्मा पार्क की परिकल्पना की गई थी। उक्त पार्क का शिलान्यास भी शहीद महेंद्र कर्मा जी के नाम से किया गया था तथा इसके निर्माण हेतु स्वीकृत निधि भी उनके नाम पर जारी की गई थी। इतना ही नहीं, पार्क का उद्घाटन भी शहीद महेंद्र कर्मा जी के नाम से ही संपन्न हुआ था।किन्तु अब जानकारी प्राप्त हो रही है कि उक्त पार्क में शहीद महेंद्र कर्मा जी की प्रस्तावित प्रतिमा स्थापित किए बिना ही अन्य परिवर्तन किए जा रहे हैं। यह न केवल शहीद महेंद्र कर्मा जी के योगदान की उपेक्षा है, बल्कि दंतेवाड़ा जिले की जनभावनाओं के साथ भी अन्याय है।हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि चेंदरू राम मंडावी जी के सम्मान अथवा उनकी प्रतिमा स्थापना पर हमें किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है। चेंदरू राम मंडावी जी आदिवासी समाज एवं बस्तर की गौरवशाली पहचान हैं और उनका सम्मान सर्वोपरि है। किंतु यदि शहीद महेंद्र कर्मा पार्क में चेंदरू राम मंडावी जी की प्रतिमा स्थापित की गई है, तो उसी स्थल पर उनके समीप शहीद महेंद्र कर्मा जी की प्रतिमा भी पूर्ण सम्मान, गरिमा एवं शालीनता के साथ स्थापित की जानी चाहिए।हम शासन एवं प्रशासन से मांग करते हैं कि शहीद महेंद्र कर्मा जी की प्रतिमा को तत्काल स्थापित किया जाए तथा पार्क के नाम “शहीद महेंद्र कर्मा पार्क” में किसी भी प्रकार का परिवर्तन या छेड़छाड़ न की जाए। किसी भी महापुरुष का सम्मान करने के नाम पर दूसरे महापुरुष की स्मृतियों को धूमिल करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा।भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि महापुरुषों का सम्मान राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू पर नहीं तौला जा सकता। यदि शहीद महेंद्र कर्मा जी के सम्मान और इस पार्क की मूल पहचान के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई, तो दंतेवाड़ा जिले सहित पूरे बस्तर संभाग में व्यापक जनाक्रोश देखने को मिलेगा। जनता अपने नेताओं और शहीदों के सम्मान की रक्षा करना जानती है तथा आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।