अधिक से अधिक पाने का भाव बंधन और सबके प्रति सहजता का भाव मोक्ष का मार्ग : पं. पंकज ।

प्रमोद दुबे 

महासमुंद :- स्थानीय लालवानी गली में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद भागवत पुराण कथा का बखान करते हुए भगवताचार्य पं. पंकज तिवारी ने सृष्टि विस्तार और शिव-सती कथा का बखान करते हुए कहा कि माता सती देवताओं को आकाश मार्ग से जाते हुए देख जिज्ञासा वश जानकारी ली कि वे कहां जा रहे है इस पर उन्हें – बताया गया कि दक्ष प्रजापति ने यज्ञ रचा है जिसमें वे शामिल होने जा रहे है। पिता के यहां यज्ञ होने की जानकारी पाकर माता सती अपने को रोक नहीं पाई और यज्ञ में शामिल होने की जिद भगवान शिव से करने लगी।

भगवान शिव ने उन्हें वहां नहीं जाने के लिए – समझाया किंतु वे नहीं मानी और जाने की जिद करने लगी। भगवान शिव समझ गए कि सती अब – वापस नही आएंगी जब यज्ञ स्थल में माता सती पहुंची तो उन्हें अपमान सहना पड़ा। और यज्ञ – परिक्रमा के दौरान जब देखी कि भगवान शिव को यज्ञ में स्थान नही दिया गया है तो वह क्रोधाग्नि में जलने लगी और देह का त्याग किया। यज्ञ विध्वंस की कथा विस्तार से वर्णन करने के पूर्व भगवताचार्य पंकज तिवारी ने माता देहुति और भगवान कपिल के बीच हुए संवाद।