खबर कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत पर अब तक कार्यवाही क्यों नहीं? आखिर कौन दे रहा है झोलाछाप डॉक्टरों को सरंक्षण? पोंड में झोलाछाप डॉक्टर रोशन निर्मलकर नियमो को ताक में रखकर कर रहा है अवैध क्लिनिक का संचालन

खबर कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत पर अब तक कार्यवाही क्यों नहीं?
आखिर कौन दे रहा है झोलाछाप डॉक्टरों को सरंक्षण?
पोंड में झोलाछाप डॉक्टर रोशन निर्मलकर नियमो को ताक में रखकर कर रहा है अवैध क्लिनिक का संचालन
परमेश्वर कुमार साहू ,3 अप्रैल 2021

जिले में अवैध कार्यों में संलिप्त लोगो को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिलता है।जिसके कारण न तो उनके ऊपर कोई कार्यवाही होती है और न ही उन लोगो को किसी भी कानून का कोई डर नहीं है।ओहदे पदों पर बैठे जिम्मेदरों के कारण ही अवैध कार्य में लगे लोग कानून को अपने जेब में रखकर घूम रहे है।अब सवाल यही उठने लगा है कि क्या कानून केवल गरीबों के लिए बना है क्योंकि अमीर तबके। के लोग पैसो और पहुंच के दम पर हर मामलों को रफा दफा कराने में महारत हासिल कर लिए है।

गौरतलब है कि गरियाबंद जिले में हजारों कि तादाद में झोलाछाप डाक्टर है जो नर्सिंग होम एक्ट व उच्च न्यायालय के सारे नियमो को ताक में रखकर संचालित हो रहे है।
इसी मामले पर लगातार खबर प्रकाशन व कार्यवाही से बौखलाए झोलाछाप डाक्टर द्वारा खबर कवरेज करने गए दो पत्रकारों के साथ बदसूलकी किये।घटना 12 मार्च की है जब खबर गंगा के रिपोर्टर अपने सहयोगी रिपोर्टर के साथ गरियाबंद जिले के छुरा ब्लाॅक के ग्राम पोंड में अवैध व विभाग से बिना परमिशन के क्लिनिक संचालन की जानकारी पर खबर कवरेज करने गए तब झोलाछाप डाक्टर रोशन निर्मलकर ,उनके बेटे व पोंड के एक और डाक्टर दिनेश साहू के बेटे द्वारा मोटरसाईकल कि चाबी छीन लिया और धक्का मुक्की ,गाली गलौज ,दुर्व्यवहार कर बंधक बनाने का भी प्रयास किया।इतना ही नहीं झोलाछाप डाक्टर रोशन निर्मालकर द्वारा खबर छापने व आस पास दिखाई देने पर देख लेने की धमकी दिए।वहीं मोबाइल को भी छीना झपटी कर तोड़ दिया।जिसकी लिखित शिकायत पांडूका थाने में किया गया है।लेकिन पखवाड़ा भर से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी इस मामले पर कोई कार्यवाही न होना कई सवालों को जन्म दे रहा है।सच लिखने और मामलों को उजागर करने वाले पत्रकारों के आवाज को दबाने जिस तरह से प्रयास किया जा रहा है उससे तो यही लग रहा है कि इस मामले के पीछे राजनीतिक दलों से जुड़े दबदबा रखने व ऊपर तक पहुंच रखने वाले लोग प्रशासन और कानून व्यवस्था पर दबाव बना रहे है।जिसके कारण उक्त झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई कार्यवाही नहीं हो रहा है।
*मामले को उजागर करने वाले पत्रकार के घर दबाव बनाने पहुंचा था सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टरों की टोली*
बताना लाजिमी है कि लगातार कार्यवाही को झोलाछाप डॉक्टर पचा नहीं पाए और सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर हमारे संवादाता के घर दबाव बनाने पहुंचे थे।उस वक्त हमारे संवादाता घर पर नहीं थे।सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टरों अपने घर के पास पहुंचे देख व उनके सवालों से घबराए उक्त संवादाता की पत्नी ने फोन कर जानकारी दी।तब कुछ पत्रकारों की टीम पीड़ित पत्रकार के घर पहुंचा ।जिसको देखकर सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर रफू चक्कर हो गए।चोरी भी और सिना जोरी कि कहावत झोलाछाप डॉक्टरों पर लागू हो रहे है ।अपने कृत्यों को छुपाने झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा पीड़ित पत्रकार से समझौते की पेशकश कर प्रपोजल देने से भी बाज नहीं आ रहे है।वहीं इस मामले पर कुछ जनप्रतिंनिधि भी अवैध कार्य करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों को सह दे रहे है ।जिसके घटना के 20 दिन होने के बावजूद भी कार्यवाही नहीं हो पाया है।अब इस मामले कि शिकायत प्रदेश के मुखिया व पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों से कर निष्पक्ष जांच की मांग किया जाएगा।
*नियमो को ताक में रखकर कर रहे है झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज*

आपको बता दे की झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा जिले में बकयदा धनवंतरी डाक्टर संघ का निर्माण किए।जिसका संबंधित विभाग से पंजीयन होने की जानकारी मिल रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब डाक्टरों के पास कोई डिग्री नहीं है और न ही विभाग में कोई पंजीयन और इलाज के लिए न कोई परमिशन ,तो संघ का पंजीयन कैसे हुआ? ये कई सवालों को जन्म दे रहा है।कई ऐसे झोलाछाप डाक्टर है जो राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े हुए है जो अपने पहुंच का दुरुपयोग कर दबाव बनाने का प्रयास करते है।कुछ रसूखदार जनप्रतिंनिधि भी झोलाछाप डॉक्टरों को सह देने में भी पीछे नहीं है।जिसके कारण विभाग भी नर्सिंग होम एक्ट और उच्च न्यायालय के सारे आदेशो कि धज्जियां उड़ा रहे है और कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति से भी विभाग के जिम्मेदार बाज नहीं आ रहे है।नतीजन झोलाछाप डॉक्टर आम नागरिकों की जान से खिलवाड़ कर मोटी रकम कमाने में लगे है।लेकिन जिम्मेदारो को आम नागरिकों की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है।

*पत्रकारिता की साख दांव पर*
पत्रकार को लोकतंत्र का चौथा आधार स्तम्भ माना गया है।जो समाज को एक नया दिशा देने के साथ साथ भ्रष्टाचार को उजागर, करने ,आम नागरिकों की समस्याओं को शासन तक व शासन की योजनाओं को जन समुदाय तक पहुंचने में अग्रणी भूमिका निभाते है।लेकिन आज के परिवेश में स्वतंत्र पत्रकारिता एक चुनौती बन गया है।सच को उजागर करने वालो पत्रकारों को समाज की रूढ़िवादी सोच ,नेताओं के दबाव सहित अनेक समास्याओ का सामना करना पड़ता है।एक पत्रकार किस तरह से हर परेशानियों और आर्थिक समस्याओं सहित जान को खतरे में डालकर सच को आयना दिखाने का काम करता है।लेकिन आज भी शासन प्रशासन को उनकी सुरक्षा के प्रति कोई सरोकार नहीं है ।जिसके कारण आए दिन पत्रकारों के साथ घटना आम बात हो गई है। ऐसे में पत्रकारिता के मूल कार्यों को संरक्षित करने वालो पत्रकारों कि जान पर मुसीबत आ रहा है और उसे अनेक प्रपंच का सामना करना पड़ रहा है।जो आने वाले दिनों के लिए कुछ अलग संकेत दे रहा है।अगर समय रहे पत्रकारों पर हो रहे जुल्म को नहीं रोका गया तो स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।आज असल पत्रकारिता की साख दांव पर लगा हुआ है।लेकिन पत्रकार सुरक्षा कानून बस मजाक बनकर रहा गया है।