स्थानीय विधायक अनूप नाग का किया पुतला दहन हम अखंड भारत के हिस्से है-अशीम राय l 

पखांजुर- भारत की स्वतंत्रता के लिए सभी जाति धर्म के लोगों का बड़ा योगदान है बंगाली ,सिंधी मारवाड़ी ,पंजाबी ,उड़िया मराठी तमिल, केरल तेलुगु हिंदुस्तानी आदिवासी सभी भाषा समुदाय वर्ग के लोगों का योगदान एवं बलिदान सदा इतिहास में याद रखा भारत की स्वतंत्रता में बंगालियों का बहुत बड़ा योगदान एवं बलिदान रहा बांग्लादेश अखंड भारत हिस्सा था 1905 में बंगाल के विभाजन कर दिया

उसके बाद वह हिंदू और मुस्लिम सांप्रदायिक लड़ाई हुई 15 अगस्त 1947 भारत आजाद हुआ भारत की आजादी के लिए बंगालियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा मुख्य रूप से खुदीराम बोस सुभाष चंद्र बोस ऋषि अरविंद रविंद्र नाथ ठाकुर बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय मातंगिनी हजरा राजा राममोहन राय गुरुचंद ठाकुर आदि दिवंगत नेताओं का बलिदान इतिहास के स्वर्ण अक्षर में लिखा गया बंगाली हिंदू अपने सनातन धर्म की रक्षा के लिए धर्म रक्षा रक्षार्थ हेतु अपने पैतृक संपत्ति को छोड़ कर भारत आए तत्कालीन भारत सरकार इन्हें नागरिकता दे कर के 1962 में दंडकारण्य प्रोजेक्ट के तहत पारलकोट के बंग भाई को यह शरण दिया संयुक्त राष्ट्र संघ के आर्थिक सहयोग से इन भाइयों को पक्का मकान बैल जमीन एवं रोजमर्रा के सामान नौकरी दिया जाना था लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार उसमें भी भ्रष्टाचार किए हैं भारत के कई हिस्सों में बंग भाई को बसाया गया अपने मातृभूमि को त्याग करके बहुत ही मेहनत करके आज यहां अपना जीविका उपार्जन कर रहा है लेकिन वर्तमान विधायक श्री अनूपनाग ने अंतागढ़ में डिबेट में कहां कि 60-62 के दशक में है विभाजन के बाद बंग समुदाय के लोग बहुत ही कष्ट में थे परेशान थे विश्व के कोई देश इन्हें शरण देने के लिए तैयार नहीं हुआ था बंगालियों को विश्व के कोई भी देश नहीं अपना रहे थे तत्कालीन कांग्रेस सरकार इंदिरा गांधी उन्हें भारत में लाया और या बसाया जबकि हम अखंड भारत के हिस्से है इन शब्दों से सभी बगं समुदाय आहत महसूस कर रहे हैं इसके विरोध में आज बंग समाज परलकोट के हृदय स्थल नेताजी चौक में स्थानीय विधायक अनूप नाग का पुतला दहन किया गया इस अवसर पर असीम राय राधेलाल नाग नारायण शाह मनोज हालदार राहुल विश्वास बासुदेव हालदार गणेश शाह बबलू सरकार गोविंद ढिल्लो शंकर सरकार कार्तिक विश्वास अमित बोस पोल्टु कुंडू स्वपन तरफदार लाल टू कुंडू ,शंकर नाग पीयूष मंडल असित व्यापारी जगदीश सिकदर विजयकर सहित इलेक्ट्रॉनिक प्रिंट मीडिया के साथी बंगबंधु उपस्थित थे।