श्रावणमास में आस्था और विश्वास ।

चांपा :- श्रावण मास को मासोत्तम मास कहा जाता हैं। शास्त्रों और पुराणों में सावन-मास के महात्म्य के विषय में पूजा-पाठ और शिर्वाचन की महत्ता प्रतिपादित की गई हैं। इसी श्रावण मास एवं शिवजी की असीम कृपा, सत्प्रेरणा तथा मलमास में बरपाली चौक के पास रहने वाले  शांता महेंद्र गुप्ता के निवास स्थान पर छोटा-सा अमरनाथ शिवलिंग का निर्माण फ्रिज़ में हुआ हैं,

जिसे दर्शन-पूजन करने दिनभर श्रद्धालु भक्तों का तांता लगा हुआ हैं। केशरवानी दंपति ने आज सुबह-सुबह भगवान श्री कृष्णचंद्र जी , शिव जी की पूजा-आराधना कर पुरूषोत्तम भगवान श्री कृष्ण जी को वस्त्राभूषण,अन्न, नैवेद्य अर्पित कर पांच ब्राह्मण दंपति की विधि-विधान से पूजा कर वस्त्रादि और दक्षिणा देकर विदा किया।इसके उपरांत सुहागिन महिलाओं को सुहाग सामग्री देकर उनके सुख सौभाग्यवती होने की कामना ईश्वर से की हैं। उन्होनें कहा कि देवाधिदेव भगवान शिवजी श्रावणमास में भक्तों के हृदय में

विविध लीलाएं रचते हैं। ईश्वरीय कृपा से मेरे घर में छोटा-सा अमरनाथ लिंग का दर्शन दिये हैं।हम सब लोग श्रावणमास भर गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और पंचाक्षर मंत्र का असंख्य महिलाओं को एकत्रित कर जाप करती हैं। लगातार शिव मंत्रों के जाप का ही सुफल हैं कि मिनी अमरनाथ के रुप में शिवजी ने दर्शन दिया हैं। देवाधिदेव शिवजी का स्नेह और आशीर्वाद बनी रहें।हमेशा ही सच्चाई और अच्छाई के मार्ग पर चलते हुए सदैव सत्कर्म करती रहूं, यही कामना करती हूं। साहित्यकार शशिभूषण सोनी ने बताया कि सुबह-सुबह भगवान अमरनाथ के रुप में महादेव {सर्पज्ञ} का साक्षात् दर्शन बड़ी भाग्यशाली हैं,  शांता गुप्ता, भगवान भोलेनाथ ने आपके मन की पुकार सुन ली हैं। भक्त खड़ी शिवद्वार में, लिए हाथ में थाल। दर्शन सर्प के रुप में, साक्षात् भगवान भोलेनाथ हैं पुष्पों की माल।। सोनी जी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में शिवजी के साथ श्रीहरि विष्णु जी का भी स्मरण करें। अधिक मास के स्वामी श्रीविष्णु जी ही हैं। कहा जाता हैं कि सभी देवी- देवताओं ने अधिमास के स्वामी बनने से इंकार कर दिया था, तब भगवान विष्णु आगे आकर इस पद को स्वीकार किये। इसीलिए इन दिनों श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए स्नान-दान, व्रत और पूजा-अर्चना अवश्य करना चाहिए।