
आसमान में हर तरफ
बादल ही बादल छायी है
वृक्षों की शाखाओं पर
नई कोपले आयी है
मेघों से ढके रवि की
अब चलती ना मनमानी
नए रंग लिए ,
प्रकृति हर्ष से करती
सावन की अगवानी ।
पक्षियां तरु पर चहक रहे ,
मिट्टी बुंदो से महक रहे ।
हर दिशा हवाएं घूम रहे
पेड़ –पौधे सब झूम रहे
उस कुम्हलाए शाखाओं पर
फिर लौट रही जवानी ।
नए रंग लिए ,
प्रकृति हर्ष से
करती सावन की अगवानी ।
मधुर गीत लिए हवाएं
चलती जब चारों दिशाएं
कभी जोर –जोर
कभी शोर –शोर
हर गली पथ तक दौड़ लगाए
बुंदो के साथ
लय ताल भर
धरा लिखती नई कहानी
नए रंग लिए
प्रकृति हर्ष से
करती सावन की अगवानी ।
झूलों से डालिया झुक रहे ,
कोकिल बागियों पर कूक रहे ।
पंख फैलाए मोर वनों में
रखती बादलों पर निगरानी
नए रंग लिए ,
प्रकृति हर्ष से करती
सावन की अगवानी ।
नदियां , झीलें सूखे ताल
वर्षा से बदल रही सब चाल ।
धरती के इस सूनेपन को ,
ऋतुओं ने भी पहचानी ।
नए रंग लिए ,
प्रकृति हर्ष से
करती सावन की अगवानी ।
– नेहा सिन्हा
रायपुर
