मंत्री साहू के कार्यक्रम में शहर के कांग्रेसियों का शामिल नहीं होना कहीं राजिम जिला की घोषणा नहीं होने का विरोध तो नहीं।

राजिम:- चुनाव की तिथियां ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है जिला का मुद्दा क्षेत्र में गरमाने लगा है हर एक की जुबान से राजिम जिला की चाहत बढ़ गई है अब तो युवा यह कह रहे हैं कि जो राजिम जिला बनाएगा उन्हीं को हमारा समर्थन जाएगा। उल्लेखनीय है कि राजिम जिला की मांग पिछले तीन दशक से अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से हो रही है। यह विधानसभा मुख्यालय है तथा तीर्थों का राजा प्रयाग नगरी के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। साक्षात् हरि और हर कमलक्षेत्र में विराजमान है। प्रदेश का सबसे बड़ा माघी पुन्नी मेला 15 दिनों के लिए लगता है। छत्तीसगढ़ सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर आयोजन को सफल बनाते हैं। अब तो स्थाई मेला के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर बजट में राशि स्वीकृत कर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई है। शुक्रवार को पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू राजिम पहुंचे और उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया और कहा कि आने वाले वर्ष में राजिम माघी पुन्नी मेला इसी स्थल पर लगेगा। आज चर्चा का विषय बना रहा कि उनके कार्यक्रम में शहर के कांग्रेसी नदारद रहे। कहीं यह राजिम को जिला नहीं बनाने का विरोध तो नहीं है। चूंकि कांग्रेस पार्टी के तमाम कार्यकर्ता चाहते हैं कि राजिम जिला बने इनके अलावा विधायक अमितेश शुक्ला ने कुछ माह पहले हुए रेस्ट हाउस के सर्वदलीय बैठक में कहा था कि मैं खुद राजिम जिला का समर्थन करता हूं। भेंट मुलाकात कार्यक्रम में राजिम पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने क्लियर कर दिया था कि वर्तमान में मैं नया जिला नहीं बना सकता क्योंकि इन्हें खड़ा करने में समय लगता है उसके बाद से यहां के लोगों को मायूसी हाथ लगी। बावजूद इसके यहां की जनता उम्मीद नहीं छोड़े हैं। शनिवार को युवा कहते हुए दिखे कि जो राजिम को जिला बनाएगा हमारा समर्थन उन्हीं को जाएगा। राजिम जिला की बात बच्चे, युवा, महिला तथा उम्र दराज लोग भी कहते हुए दिखे। यह भी बताना जरूरी है कि देश में जितने बड़े तीर्थ स्थल है लगभग सभी जिला मुख्यालय के रूप में अस्तित्व में आ चुके हैं वैसे भी राजिम छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है यहां प्रतिदिन स्नान दान अस्थि विसर्जन दर्शन पूजन पर्यटन इत्यादि के लिए बड़ी संख्या में देशभर से लोग प्रतिदिन आते जाते रहते हैं। जिला मुख्यालय बन जाने से क्षेत्रीय विकास के साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सीताबाड़ी में हुए खुदाई के अनुसार राजिम नगरी को ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी का माना गया है। यहां के मंदिरों में उत्कीर्ण शिलालेख से छत्तीसगढ़ के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है। जानकारी हो कि नगर पंचायत राजिम पिछले वर्ष अप्रैल में सामान्य सभा की बैठक में राजिम को जिला बनाने के प्रस्ताव पारित कर नगरी प्रशासन एवं मुख्यमंत्री के पास मांग पत्र भेज दिया था। यह प्रस्ताव पारित हुए 1 वर्ष से भी अधिक समय हो गया है लेकिन अभी तक इस दिशा में शासन प्रशासन का कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है नहीं सरकार ने कोई घोषणा किए हैं।