बारिश आंधी से धान किसी का 60% तो किसी का 70% नुकसान।

राजिम :- करीब पिछले 10 दिनों से लगातार हो रहे आंधी बारिश से किसानों के फसल बर्बाद हो गए हैं। आंधी से खड़ी फसल जमीन पर लिपट गए हैं और बारिश से दाने सड़ने शुरू हो गए हैं। दाना झरने से पहले से ही 40 से 50% तक नुकसान हो गया था लेकिन कल रात में जोरदार बारिश के चलते 20% और नुकसान हो गया और इस तरह से 60 से 70% फसलों के नुकसान किसान अपने मुंह से खुद कह रहे हैं और अब वह फसलों की स्थिति को देखकर आंसू पीने में मजबूर हो गए हैं। बरोंडा के किसान पुरुषोत्तम सेन ने बताया कि मेरे खेत में पानी का धार चल रहा है धान पूरी तरह से लिपट गया है। हमने धान कटाई की तैयारी कर लिए थे हार्वेस्टर वाले को बोल दिया था वह कटाई के लिए आने ही वाले थे कि बारिश और आंधी ने सब कुछ सत्यानाश कर दिया। राजिम के किसान भोले साहू ने बताया कि ढाई एकड़ खेत में धान की फसल लगाए हैं आंधी बारिश के चलते 75% नुकसान हुआ है। मात्र 25% बचे हैं अब क्या करें समझ में नहीं आता। उन्होंने बताया कि ढाई एकड़ खेत में लागत मूल्य 40 से 50 हजार तक आई है इसे मेंटेन करने के चिंता लगी हुई है।

इसी तरह से मोती सोनकर डेढ़ एकड़, टीकम पाल ढाई एकड़, कृष्णा पटेल 13 एकड़, गोपाल पटेल 5 एकड़, ललित पटेल 3 एकड़, भवानी शंकर साहू 5 एकड़ खेत पर फसल लगाए हैं उन्होंने बताया कि खेती करना बहुत महंगा हो गया है जोताई से लेकर बीज छिड़काव, खाद छिड़काव, मजदूरी, खाद, पानी, ट्रैक्टर का किराया सब कुछ बढ़ा हुआ है। मशीनी युग होने के बावजूद खेतों की बच्चों की तरह सेवा करना पड़ रहा है बावजूद इसके एन वक्त पर उपज लेने के समय मौसम की मार ने किसानों को बेहाल कर दिया है। हम बहुत चिंतित हैं कि अब क्या करें आगे की जिंदगी कैसे गुजरेगी परिवार का पालन पोषण कैसे होगा।

चौबेबांधा के किसान लीलाराम साहू ने बताया कि उनके खेत में खड़ी फसल जमीन के बराबर हो गए हैं। खेतों में पानी भर गए हैं। दाने पानी में डूबने के कारण खराब हो गए हैं। हमारे खेत से 60% धान अभी से नुकसान हो गए हैं बचे 40% प्राप्त होगा कि नहीं चिंता में है। किसान संतोष सोनकर ने बताया कि अधिकतर कटाई के समय ही प्रकृति का मार हम किसानों के ऊपर पड़ता है। सरकार किसानों के खेत में हुए धान के नुकसान का जानकारी एकत्र करें और उसके लिए शीघ्र मुआवजा राशि प्रदान करें तभी हम किसानों की स्थिति कुछ सुधर पाएगी। इसी तरह से कोमा, किरवई, सेम्हरतरा, सिंधौरी, श्यामनगर, सुरसाबांधा, तर्रा, कुरूसकेरा, देवरी, कोपरा, जेंजरा, हथखोज, पोखरा, पीतईबंद, रावड़, भैंसातरा, बेलटुकरी, कोंदकेरा, पारागांव, बासीन, पथर्रा, नवाडीह, पीपरछेड़ी, बोरसी, छुईहा आदि गांव के किसान आंधी बारिश से परेशान हो गए हैं। नुकसान को लेकर अत्यंत चिंतित है अब इनके लिए मात्र एक उम्मीद भूपेश सरकार की ओर है कि वह उनके नुकसान की भरपाई करने में मुवावजा देकर सहयोग प्रदान करें। इक्का-दुक्का किसान धान कटाई कर उपज घर में ला लिए हैं लेकिन उन्हें सुखाने के लिए जगह नहीं है। धान गिला है। बेचने के लिए सुखाने की जरूरत है जो किसान धान कटाई नहीं की है वह तो अपने नुकसान को लेकर चिंतित है ही, परंतु जो कटाई कर चुके हैं उनकी भी चिंता कम नहीं हुई है।

सोमवार को नौ बजे निकला धूप-रात को बारिश होने के बाद सुबह भी बारिश का दबदबा रहा बूंदाबांदी होती रही उसके बाद 8:00 बजे तकरीबन पानी गिरना पूरी तरह से बंद हो गया। 9:00 धूप निकले। दिन भर बादल साफ रहे और सूर्य देव का दर्शन होते रहे। मौसम में नमी के चलते तापमान 29 डिग्री सेल्सियस हो गया। नई के शुरुआती दौर पर पिछले साल पारा चढ़ा हुआ था 42 से 43 डिग्री सेल्सियस खूब तपा रहा था। इस बार मौसम परिवर्तन होने के कारण गर्मी के मौसम में ठंड लग रहे थे। सुबह-सुबह कई लोग स्वेटर पहनकर बाजार में निकले हुए थे।