शहर के पसरा बाजार में तेंदू फल हाथों-हाथ बिका।

राजिम :- शहर के महामाया पसरा बाजार में तेंदू फल हाथों हाथ बिक गया। यह मौसमी फल है। शहर में इनके पेड़ लगभग समाप्त हो गए हैं। गांव में यदा-कदा उपलब्ध हो जाते हैं यहां से 30 से 35 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी क्षेत्र लग जाता है जिसमें घटारानी जतमई जंगल के अलावा पांडुका पोंड के आगे पहाड़ी एवं जंगली क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। राजिम थोक सब्जी मंडी में बड़ी संख्या में तेंदू बिकने के लिए आ रहे हैं। आते ही इनके खरीददार भी मिल जाते हैं और जैसे ही पसरा बाजार में यह मौसमी फल आता है लोग इन्हें खरीदने के लिए टूट पड़ते हैं। रविवार को छुट्टी का दिन था जैसे ही खरीददारों ने तेंदू फल को देखा उसके बाद खरीदने के लिए भीड़ लग गई। पहले तो बेचने वाले ₹30 किलो कह रहे थे लेकिन बाद में उन्होंने ₹20 किलो में ही सारे तेंदू विक्रय कर लिये। तेंदू पीला, लाल और नारंगी रंग में दिखता है। तेंदू टमाटर की भांति दिखने वाला एक फल है टमाटर का आकार बड़ा छोटा दोनों होता है लेकिन तेंदू का फल मध्यम एवं छोटा दिखाई देता है। यह पीला, लाल और नारंगी रंग में नजर आता है इनका आकार गोलाकार होता है पका हुआ तेंदू का फल रसदार और स्वाद में मीठा होता है जो खाने में खजूर और आलूबुखारे का मिश्रण प्रतीत होता है वहीं कच्चे फल का स्वाद कड़वा और कसैला लगता है। लोगों का कहना है कि तेंदू चीकू से भी मीठा होता है और आयुर्वेदिक गुण विद्यमान होते हैं।

90 के दशक में हर गांव में तेंदू के पेड़ मिल जाते थे-90 के दशक में हर गांव शहर में तेंदू के पेड़ बड़ी संख्या में मिल जाते थे लोग इन पेड़ों से तेंदू को फल लेकर खूब खाते थे। समय के साथ साथ पेड़ कट गए और अब नई पीढ़ी को तेंदू के बारे में बताने की जरूरत हो गई है। बता दें कि गर्मी के मौसम में ही तेंदू का फल उपलब्ध होता है इसे खाने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं दूर होती है। ज्यादा मात्रा में लेने से नुकसान भी होता है। तेंदू में कॉपर, पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैंगनीज, विटामिन ई, विटामिन के, विटामिन सी और सेलेनियम जैसे तत्व पाए जाते हैं यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक भी है।