
राजिम :- वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। साल भर में 24 एकादशी होते हैं माह के दोनों कृष्ण और शुक्ल पक्ष 1-1 एकादशी मिलाकर 12 महीने लगातार एकादशी का व्रत श्रद्धालु करते हैं। इसमें भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वराह रूप की पूजा होती है। जानकारी के मुताबिक इस एकादशी का व्रत करने से अन्नदान और कन्यादान दोनों श्रेष्ठ दानों का फल मिलता है। इस एकादशी के तिथि आरंभ 15 अप्रैल रात्रि 8:46 से शुरू हो गया है समापन 16 अप्रैल को शाम 4:15 में हुआ और पारणा 17 अप्रैल को सुबह 9:30 तक किया जाएगा। प्रयाग नगरी में है वराह अवतार का मंदिर वरुथिनी एकादशी के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ बन गई।

पूजन आरती के समय घंटियों की झंकार, शंख ध्वनि, तालियों की गड़गड़ाहट तथा भगवान राजीव लोचन की जय कारा से पूरा मंदिर परिक्षेत्र गूंज उठा। बता देना जरूरी है कि अंचल में एकादशी का व्रत बड़ी संख्या में किया जाता है। इसे सबसे बड़ा व्रत माना गया है। बगैर भोजन किया विष्णु नाम का रटन करते हुए व्रत धर्म का पालन किया जाता है। सुबह-शाम पूजन आरती तथा विष्णु की महिमा का पठन होता है। भगवान विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराया जाता है। इत्यादि पूजन विधि के द्वारा उन्हें प्रसन्न करने का हर संभव प्रयास होता है। वरुथिनी एकादशी को भगवान विष्णु के वराह रूप की खास तौर से पूजा-अर्चना होती है। भगवान राजीव लोचन मंदिर के चारों कोण में चार धाम स्थित है जिनमें से दक्षिण पश्चिम दिशा में वराह अवतार मंदिर है। मंदिर का द्वार पूर्वाभिमुख है। प्रतिमा तकरीबन साढ़े चार फीट की ऊंचाई लिए हुए हैं। इसी मंदिर के सामने भगवान विष्णु का एक और रूप वामन अवतार तथा मंदिर के ढाई ओर बद्रीनारायण अवतार और उनके सामने उत्तर पश्चिम दिशा में नरसिंह भगवान का मंदिर है। प्रयाग नगरी राजिम में विष्णु के अनेक मंदिर है जहां प्रतिदिन दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है तेज गर्मी होने के कारण भी श्रद्धालु मंदिर दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं।
