आर्सेलर मित्तल के पास नहीं है स्वयं का पुल और न ही स्वयं का रोड रास्ता।

किरंदुल / रणवीर सिंह चौहान

किरंदुल :- अरबों रुपए अर्जित करने वाली कम्पनी की असलियत है धूर्तता वा चालाकी, संयंत्र से निकले गार्बेज से धीरे धीरे आदिवासियों की जमीन हो रही है बंजर, हरियाली लाने के नाम पर कम्पनी लगाती है बेशरम के पौधे और दिखा रही है अपनी बेशर्मी, सच्चाई उजागर करने।पर पूरे जिले के पत्रकारों को धमका रहा है कंपनी का मीडिया सेल प्रभारी सिंह, जिले के पत्रकारों में एवम पत्रकार के संगठनों में फैल रहा है गहरा आक्रोश, संबंधित व्यक्ति द्वारा दी जा रही है झूठे मामलों। में फंसाने की धमकियां, पत्रकारों ने एकजुट होकर किया कंपनी का काला सच उजागर करने का फैसला। यह बड़ी ही हासशयपद बात है की आर्सेलर। मित्तल जो एक अरबपति कम्पनी है उसके पास अपने कर्मचारियों एवम मजदूरों के आने जाने के लिए एक छोटा सा पुल भी नहीं है, एनएमडीसी द्वारा 22 वर्ष पूर्व ग्रामीणों के आने जाने के लिए लाल नाले के उपर लोहे का एक संकरा सा ब्रिज बना दिया गया था उसी ब्रिज का इस्तेमाल कंपनी के कर्मचारी वा मजदूर करते हैं और तेज गति से दो पहिया वाहन से रफ्तार से पुलिया को पार करते हैं जिससे अनेक बार दुर्घटना हुई है जिन्हें थोड़े बहुत।

पैसे देकर कंपनी मैनेज करती रहती है इनका एकमात्र ध्येय केवल एनएमडीसी का मॉल बेचकर करोड़ों अरबों रुपए अर्जित करना है एवम संयंत्र से निकले जहरीले अपशिष्ट को आदिवासियों की जमीन शाम, दाम, दण्ड, भेद की नीति अपनाकर हासिल कर उस पर डाल देना है, फूलपाड गांव में भी कंपनी ने इसी तरह धूर्तता का 25 एकड़ से अधिक भूमि पर कब्जा कर रखा है एवम विगत 3 वर्षो से वहा अपशिष्ट फेंकने की जुगत में लगे हुए हैं एवम ग्रामीणों।को तरह तरह के प्रलोभन देना निरन्तर जारी है किन्तु वहां का आदिवासी वर्ग पड़ा लिखा हुआ है एवम एकजुट है इस कारण कंपनी की वहां एक नहीं चल पा रही है जब जब कंपनी ने प्रयास किया उन्हें मुंह की खानी पड़ी है, उक्त गांव फूलपाड की यह जमीन कैसे एस्सार के हाथ आई फिर। कैसे आर्सेलर मित्तल को मिली यह षडयंत्र की पूरी एक गाथा है जिसका खुलासा जिले के पत्रकार बाद में करेंगे कंपनी का गारबेज लेकर गांव के रोड़ों पर दौड़ते इनके टिप्परर, ट्रक साक्षात यमराज की तरह से नजर आते हैं ग्रामीण भयभीत हैं किंतु विवश हैं सत्ता, पैसा और बाहुबल का गठजोड़ उन्हें पंगु बना रहा है किंतु अब जिले के पत्रकारों ने उनका साथ देने का निर्णय कर लिया है कंपनी की हिटलर गिरी बस अब कुछ चन्द दिनों की मेहमान है आवश्यकता पड़ी तो पत्रकार सीधे रोड पर आने के लिए तत्पर है।