विदेशों में छत्तीसगढ़ी धुन पर कार्यक्रम देने की इच्छा है: हितेश पटेल।

राजिम :- चौबेबांधा में चल रहे राज्य स्तरीय रामायण सम्मेलन में प्रस्तुति देने पहुंचे पावन धारा मानस परिवार छुईहा के आर्गन वादक हितेश पटेल ने अपने शानदार आवाज के जरिए श्रोताओं की भीड़ में जगह बना ली। उन्होंने झूमकर आर्गन में एक से बढ़कर एक छत्तीसगढ़ी, हिंदी एवं ओड़िया धुन की बरसात कर दी। प्रस्तुति को देखकर कम समय में सैकड़ों लोग इनके कलाकारी के मुरीद हो गए। चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि मेरी उम्र 18 वर्ष है और 12 वीं कक्षा में परीक्षा दिया हूं। आगे संगीत की शिक्षा लेकर छत्तीसगढ़ी संगीत को विदेशों में पहचान देने की इच्छा है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही संगीत के प्रति मेरा लगाव बना रहा। मेरे पिता नरेश पटेल तथा दादा सोनू पटेल संगीत के पुजारी थे। संगीत सीखने का मौका मुझे उन्हीं से मिला। वही मेरे गुरुदेव और प्रेरणा स्रोत भी है। वर्तमान में आर्गन के अलावा बैंजो, तबला, पैड, ढोलक समेत अनेक इंस्ट्रूमेंट बजा लेता हूं परंतु मेरी पहचान ऑर्गन प्लेयर के रूप में पूरे छत्तीसगढ़ में है। 8 साल की उम्र में गीत संगीत पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया और 14 वर्ष की उम्र में प्रथम मंचीय शुरुआत हो गई उसके बाद लगातार हजारों मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर मिला है। रायगढ़ के लोक कलाकार नितिन दुबे के साथ में मंच साझा करने का अवसर मेरे जीवन का बहुत सुखद पहलू है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उड़ीसा समेत देश के अनेक राज्यों में जाने का अवसर मिला है इस उम्र में विदेश जाने की इच्छा है। प्रतिदिन एक घंटा रियाज करता हूं और कलाकारों के साथ में एक अच्छा संबंध है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में विदेशों में छत्तीसगढ़ी संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर मुझे जरूर मिलेगा। बॉलीवुड के गायक सोनू निगम एवं छालीवुड के नितिन दुबे, अनुज शर्मा एवं सुनील तिवारी से मैं ज्यादा प्रभावित हूं। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास कलाकार को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गांव गांव में रामायण प्रतियोगिता कराकर गांव के कलाकारों को ऊपर उठने का मौका दिया है। इसी तरह से लोककला मंच पर भी फोकस करें इससे कलाकारों को मंच तो मिलेगा। लेकिन मंचीय अभाव में कई कलाकार सिमट कर रह जाते हैं उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिले। हितेश पटेल ने आगे बताया कि रामायण मनोरंजन नहीं बल्कि आत्मा रंजन है। आज जितने भी कलाकार आगे बढ़े हैं इनमें से अधिकांश रामायण मंच तथा लीला मंडली के कलाकार है। गांव की ही मंडली से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है और धीरे-धीरे कर पूरी दुनिया में उनको अपने कलाकारी दिखाने का मौका मिलता है। वर्तमान में रामलीला का कार्यक्रम कई जगह बंद सा हो गया है छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह है की रामलीला के कार्यक्रम को जिस तरह से रामायण कार्यक्रम करवाए हैं उसी तरह से इन्हें भी करवाएं इससे छत्तीसगढ़ में कलाकार की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी। कलाकार अपनी संस्कृति के पुजारी होते हैं और पूजा करना ईश्वर को प्राप्त करने के बराबर है। संगीत साधना है बस मेहनत करते जाइए आपको आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। इस मौके पर उनकी टीम के कलाकार ओमप्रकाश यादव, वीरेंद्र कोसले, मनेश्वर ध्रुव, अजय साहू, पुखराज साहू, मोक्षय साहू, लिलेश साहू की प्रस्तुति को काफी सराहना मिली।