अन्याय के खिलाफ हुंकार हैं हम हिंदुत्व ही तो हैं पहचान हमारी।

विषय-भगवा रंग
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अन्याय के खिलाफ हुंकार हैं हम
हिंदुत्व ही तो हैं पहचान हमारी।
झुकते नहीं दुश्मन की ललकार से
धर्म की रक्षा में खड़े हैं भगवाधारी।

त्याग व तपस्या की कहती गाथा
सत्य सनातन संस्कृति के रखवाले,
ऋषि-मुनियों के उद्गार की बहें धारा
राष्ट्रप्रेम से गुंजित हिन्दुस्तान हमारा।

घर-घर भगवा ध्वज हमें फहराना
मानवीय मूल्य को स्थापित करना,
शुद्धता व पवित्रता का प्रतीक हैं
हर हिन्दू का भगवा से नाता गहरा।

संयम व मर्यादा की देती प्रेरणा
सेवा के पथ पर हमें हैं चलना,
वसुदेव कुटुंबकम् का रखते भाव
ईर्ष्या-द्वेष व बैर का नहीं हैं काम।

एकता के सूत्र में बंधे हम सारे
जाति- मजहब की तोड़कर दीवारें,
आपस में ही नहीं अब लड़ना हैं
प्रेम सद्भाव व शालीनता से रहना।

पहनकर केसरिया रंग का चोला
जय-जय श्रीराम हर बच्चा बोला,
मेहनतकश मजदूर और किसान
भारत की यह भूमि बनें महान।

इतिहास के गौरव का इसमें बखान
तेज शौर्य और पराक्रम का हैं चिन्ह,
मस्तक पर तेज बन यह चमकता
अधर्म पर अंगारें सा जो दहकता।।
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प्रेषक,
कवयित्री
सरोज कंसारी
नवापारा राजिम
जिला-रायपुर(छ. ग.)