गोंडी का मानक शब्दकोश बनाने बीजापुर में शुरू हुई एक अनोखी पहल।

बीजापुर:- राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के दिशा निर्देशानुसार, कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक समग्र शिक्षा राजेंद्र कटारा के मार्गदर्शन में गोंडी का मानक शब्दकोश कार्यशाला डाइट बीजापुर के प्रशिक्षण हाल में डीईओ, सहायक आयुक्त, डीएमसी, एपीसी पेड़ागाजी एवं आगंतुक गणमान्य गोंडी विशेषज्ञों की  उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ 15 मार्च 2023 को  हुआ।

गोंडी देश के कम से कम 6 प्रदेशों में बोली जाती है जिसमें छत्तीसगढ़ भी एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने एक प्रयास शुरू किया है कि इन सभी प्रदेशों में बोली जाने वाली गोंडी की विभिन्न बोलियों को मिलाकर एक मानक गोंडी का निर्माण किया जाए जिससे गोंडी आठवीं अनुसूची में शामिल हो सके और गोंडी में प्रशासन, क़ानून, शिक्षा और पत्रकारिता जैसे काम हो सकें। इस काम के लिए पहली कार्यशाला बीजापुर ज़िले में 15 से 17 मार्च तक आयोजित हुई। इस कार्यशाला में राज्य सरकार ने सभी 6 प्रदेशों से गोंडी के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया था जहां अभी भी गोंडी बोली जाती है। इस कार्य में बीजापुर ज़िले के 30 शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की जिन्होंने 6 प्रदेशों से आए 45 गोंडी विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस कार्य हेतु विशेष रूप से बनाए गए मोबाइल ऐप से विभिन्न प्रदेशों में बोली जाने वाली गोंडी बोलियों से समानार्थी शब्द इकट्ठा किए गए। ऐसी ही कार्यशालाएँ अब दंतेवाड़ा, नारायणपुर और कांकेर ज़िले में भी आयोजित की जाएँगी, जहां स्थानीय शिक्षकों और बाहर से आए गोंडी विशेषज्ञों की मदद से और गोंडी के समानार्थी शब्द इकट्ठे किए जाएँगे। उसके बाद माह के अंत में यह 6 प्रदेशों के गोंडी विशेषज्ञ रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर में 27 से 31 मार्च के बीच इकट्ठा होकर इन समानार्थी गोंडी शब्दों से मानक गोंडी डिक्शनरी बनाने का प्रयास करेंगे। बीजापुर ज़िले के शिक्षा विभाग के सहायक परियोजना अधिकारी एटला वेंकट रमन ने बताया, गोंडी को एक समृद्ध भाषा बनाने के लिए राज्य शासन में एक बड़ा प्रयास शुरू किया है जिसे गोंडी बोले जाने वाले किसी अन्य प्रदेश ने अब तक शुरू नहीं किया। हमें आशा है कि इस प्रयास के बाद गोंडी एक उन्नत भाषा बन सकेगी। यद्यपि यह एक बड़ा और लम्बा काम है जिसमें अभी काफ़ी वक्त लगेगा। हमारे गोंडी भाषी शिक्षकों ने इस काम में बहुत रुचि ली है और हमें आशा है कि राज्य सरकार की सक्रिय मदद से हम भविष्य में इस काम को अपने अंजाम तक ले जा सकेंगे।