*कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसानों ने किया के एम पी नेशनल हाइवे जाम*
*शांतिपूर्ण आंदोलन को 100 दिन पूरा होने पर सरकार के खिलाफ मनाया काला दिवस*

केन्द्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन के 100 दिन पूरा होने पर 6 मार्च को आंदोलनरत किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ कुंडली-मानेसर-पलवल नेशनल हाईवे जाम कर काला दिवस मनाया और मांग किया कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार जितना जल्दी हो सके कॉरपोरेट परस्त व किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानून को वापस ले, न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी की कानूनी गारण्टी दे, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप कृषि उपजों का लागत से डेढ़ गुणा न्यूनतम समर्थन कीमत तय करे, प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर लाये गए कानून पर किसान विरोधी कॉलम को रद्द करे, बिजली संशोधन मसौदा 2020 को वापस ले। सभी राज्यों में सरकारी कृषि उपज मंडियों की पर्याप्त व्यवस्था किया जाए। “जब तक कानून वापस नहीं तब तक घर वापस नहीं” किसानों का नारा बन चुकी है।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव व छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही जो 9 फरवरी से सिंघु बार्डर पर किसानों के साथ आंदोलन में शामिल है। उन्होंने उपरोक्त जानकारी देते हुए कहा कि किसानों का शांतिपूर्ण आंदोलन जारी है जो एक ऐतिहासिक आंदोलन बन चुकी है। मोदी सरकार कहती है कि एम एस पी था, है और रहेगा लेकिन दूसरी तरफ इसे लिखित रूप में देने के लिए तैयार नहीं है। किसानों को पुरानी व्यवस्था का एम एस पी नहीं चाहिए क्योंकि उसका लाभ केवल 6 प्रतिशत ही किसानों को मिल पाता है। 23 किस्म के कृषि उपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होती है परंतु गेँहू और धान का सीमित खरीदी के अलावा कोई अन्य फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी की व्यवस्था सरकार के पास नहीं है जिसके कारण किसान अपनी उपजों को औने पौने दाम पर निजी व्यापारियों को बेचने मजबूर होते हैं। कॉरपोरेट हितैषी लोग यह भी कहते हैं कि किसानों के अनाजों को खरीदी की दामों में वृद्धि होने से उपभोक्ता वस्तुओं की दामों में वृद्धि हो जाएगा। उन्हें समझना चाहिए कि एम एस पी किसानों के उत्पादन लागत के अनुरूप लाभकारी मूल्य भी सरकार तय नहीं करती है। किसानों की उपज खरीदने वाले व्यापारी अपनी दामों में उपज खरीदते हैं और प्रसंस्करण पश्चात अपने दामों में उपभोक्ताओं को बेचते हैं यहाँ पर प्रसंस्करण लागत और लाभकारी मूल्य क्या होनी चाहिए इसका भी निर्धारण सरकार करे तो उपभोक्ता वस्तुओं की दाम काफी कम हो सकता है।
कुंडली-मानेसर- पलवल नेशनल हाइवे चक्काजाम में अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सदस्यगण कॉमरेड वशिष्ठ (झारखंड) दीपक कुमार (उत्तर प्रदेश) राम रहीस (मध्यप्रदेश) इकबाल सिंह ( झारखंड) क्रांतिकारी महिला संगठन के उपाध्यक्ष कॉमरेड उर्मिला ( मध्यप्रदेश) क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच के संयोजक कॉमरेड तुहीन ( छत्तीसगढ़) शिशु रंजन, विक्की, विजेंद्र, मीनू आदि उपस्थित रहे।
