डॉ. रविप्रकाश दुबे को छत्तीसगढ़ विभूति अलंकरण।

बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ी के महाकवि तथा प्रथम ईसुरी पुरूस्कृत से अलंकृत छत्तीसगढ़ी के प्रतिष्ठित साहित्यकार कपिलनाथ कश्यप की 117 वीं जयंती का आयोजन सरस्वती शिशु मंदिर, प्रताप चौक के भव्य सभागार में डॉ. रविप्रकाश दुबे कुलपति डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, करगीरोड कोटा के मुख्य आतिथ्य, डॉ. विनमय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की अध्यक्षता एवं डॉ. अनिल भतपहरी सचिव छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग रायपुर के विशेष आतिथ्य में जहाँ डॉ. रविपप्रकाश दुबे कुलपति जी को छत्तीसगढ़ विभूति अलंकरण से सम्मानित किया गया, वहीं छत्तीसगढ़ी राजााषा पर पी-एच.डी. की उपाधि अर्जित करके यशस्वी रहे डॉ. विवके तिवारी एवं छत्तीसगढ़ी के प्रतिनिधि महिला कवयित्री  वसंती वर्मा को शाल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह और पुष्प गुच्छ प्रदान करके महाकवि कपिलनाथ कश्यप सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर कपिलनाथ कश्य जी द्वारा लिखित हिंदी खण्डकाव्य “प्रेम-पीयूष” का विमोचन किया गया जिसकी सांगोपांग समीक्षा डॉ. विश्वनाथ कश्यप व डॉ. अनिता सिंह ने किया। डॉ. रविप्रकाश दुबे ने छत्तीसग विभूति अलंकरण को स्वीकारते हुए खुशी जाहिर की और आयोजको को बधाई देतु हुए कहा कि कपिलनाथ कश्यप के अवदान के मूल्यांकन और उनकी कृतियों का प्रकाशन कश्यप जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि प्रमाणित हुई है। अध्यक्षीय आसंदी से उद्बोधित उद्गार के उपक्रम में डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि कश्यप जी ने छत्तीसगी के तीन महाकाव्यों के साथ काव्य, निबंध, कहानी, एकांकी नाटक और आत्मकथा लिखकर जहाँ छत्तीसगढ़ी साहित्य को बहुविध समृद्ध किया है, वहीं हिंदी में विशेषकर मुक्तक और खण्ड काव्यों का प्रणयन कर प्रतिष्ठित कवि के रूप में विख्यात हैं। डॉ. पाठक ने इनकी जयंती कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ी भाषा में संचालित करने की दृष्टि से भी कीर्तिमान स्थापित करने वाला आंदोलन बतलाया । विशेष अतिथि डॉ. अनिल भतपहरी ने अपने संबोधन में कहा कि कपिलनाथ कश्यप जी के लिखे छत्तीसगढ़ी हिन्दी के पाण्डुलिपि के प्रकाशन के काम दूसर पीढ़ी के मन करथ हावय ये हर छत्तीसगढ़ी बर गौरव के बात आय। देवेश सिंह ने कहा कि- “कश्यप जी साहित्यकार के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रुप में अमूल्य योगदान दिया, वें शहीद चन्द्रशेखर आजाद के शहादत के चश्मदीज थे। कुलपति डॉ. रविप्रकाश दुबे ने कहा कि ” छत्तीसगढ़ी को कैसे संरक्षित किया जाये। छत्तीसगढ़ी के प्रति रूझान बढ़ा है, यह अच्छा संकेत है। लोगों में।