72 करोड की लागत से निर्माण किये गए जल प्लावन योजना खेतो तक पानी पहुचाने में नाकाम साबित हुए।

रेत से पट गया कुंआ, पिछले वर्ष सफाई किये मजदूरो को अब तक नही मिली लाखों की मजदूरी भुगतान।

मैनपुर :- गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर एंव देवभोग के 26 गांव के 7 हजार किसानों के 10 हजार एकड़ से भी ज्यादा खेतों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने मैनपुर विकासखण्ड के उरमाल जल प्लावन योजना में पैसा पानी की तरह बहाया विभाग ने पर सिंचाई सुविधा देने में नाकाम साबित हो रही 72 करोड की लागत से बनी सिंचाई परियोजना, सिंचाई के लिए जिस कूएँ में नदी का पानी भरता है।

वह रेत से भरा पड़ा है तो नहरों में पेड, पौधे, झुरमुट पेड़ उग गया, जीरो चैन में मौजूद किसान भी तरस रहे सिंचाई के लिए। सिंचाई अनुविभाग देवभोग में मौजूद 23 सिंचाई योजनाओ में से सबसे वृहद व ज्यादा लागत से बनी योजना उरमाल जलप्लावन योजना है, 72 करोड़ लागत से तैयार इस योजना में खरिफ सीजन में ही मैनपुर व देवभोग के 26 गांव के 3186 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा देने का प्राक्कलन तैयार किया गया था।

योजना 2015 में शुरू हुआ, शुरुवात के दो साल धौराकोट, उरमाल, चनाभांठा मगररोडा तक बमुश्किल 600 एकड़ में सिंचाई दिया गया, लेकिन अब देख रेख के अभाव में 2 किमी तक भी ठीक से पानी नहीं पहूच रहा है, नहरो में पेड पौधे उग गये है नही हो पाई है सफाई, इस सिंचाई वृहद योजना में 23 किलोमीटर लम्बी मूख्य नहर है, 39 किलोमीटर लम्बी साखा नहरें बनी है, हेड एरिया के शुरवाती चैन में जंहा तक पानी का बहाव आता था, उन स्थानों पर पेड पौधे उग गये है व जलकुम्भी से भरा पड़ा है नहर विगत 3 वर्षो से नहरों की स्थिति खराब है 8 से 10 किलोमीटर नहरों तक पहले किसी तरह पानी पहूंचता था। पर अब बमुश्किल 3 किलोमीटर भी पानी नहीं पहूच रहा। रेत से पट गया है कुंआ,5 में से केवल 2 गेट से भर रहा पानी, कराडो के लागत से निर्माण किये गये यह जलप्लावन योजना इकलौती ऐसी योजना है जो प्रदेश भर में केवल गरियाबंद जिले के उरमाल में लागू है, योजना में नदी के किनारे वृहद कूएँ का निर्माण किया गया है, जो नदी के बेड लेबल के अलावा 7 से 10 फिट नीचे के पानी भी कूएँ में आ जाता है, नदी के पानी कूएँ में भरने के लिए अलग अलग लेबल पर 5 गेट बने हुए हैं, निचे के तीन लेबल का गेट में रेत भरा पड़ा है, कूएँ के भीतर भी रेत से पटा पड़ा है जिससे नदी के बहाव का पानी योजना के अनरूप कूएँ में नही आ पा रहा है, कूँआ खाली होने के कारण ही नहरों में सिंचाई के लिए पानी नहीं जा पा रहा है।

पूर्व में सफाई करने वाले मजदूरों को नही दिया गया है अब तक मजदूरी-जिस गाँव एनासर में हेड वर्क का निर्माण हुआ है, नहरों की सफाई के लिए उसी गाँव के कुछ मजदूरों को नहर व कूएँ के रेत की सफाई के काम पर लगाया गया था, ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल 4 माह तक सफाई का काम किये थे, जिसका भुगतान नहीं किया गया। इस सिंचाई योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ किसानों को मिले मुख्यमंत्री को लिखेंगे पत्र क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सेवन पुजारी, श्रावण सतपथी, ललिता यादव ने कहा इतना बड़ा सिंचाई योजना का क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलना चाहिए इसके लिए जल्द ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर सिंचाई योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे साथ ही सिंचाई योजना की जांच कराने की मांग किया जाएगा, एसडीओ ने कहा फंड नही कैसे कराये सफाई, इस सबंध में चर्चा करने पर एसडीओ दीपक पाठक ने कहा कि नहर की सफाई का कोई मद नही है, बगैर किसी फंड के इतनी बड़ी नहर की सफाई सम्भव नही है। जिन मजदूरो का भुगतान बाकी है उन्हें मजदूरी भुगतान कराया जाएगा।