राजिम :- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राजिम में होली मिलन का कार्यक्रम रखा गया जिसमें ब्रह्माकुमारी हेमा दीदी ने होली का तिलक लगाया एवं सभी को प्रसाद वितरण किया गया होली का महत्व बताएं होली का मतलब है हम भगवान के हो गए दूसरा “Holi”का मतलब पवित्र भी होता है तीसरा होली का मतलब जो भी बातें बुरा हमारे जीवन में हो गया उसको भूल जाना है माना हो गया होली इसलिए होली में सबसे पहले दिन जलाते हैं इसमें बताया जाता है की भक्त प्रहलाद एवं होलिका बुआ थी भक्त प्रहलाद की दोनों आग में बैठते हैं लेकिन होलिका जल जाती है और भक्त पहलाद बच जाते हैं माना हम परमात्मा की याद रूपी योग अग्नि में बैठते हैं तो हमारे अंदर के पाप जो होलिका के रूप में बैठे है हमारे अंदर भस्म हो जाता है और आत्मा परमात्मा की याद से उस अग्नि में शुद्ध पवित्र हो जाती है दूसरा दिन मनाते हैं जिसमें सभी को रंग गुलाल लगाया जाता है का मतलब है परमात्मा के साथ मंगल मिलन मनाना और परमात्मा के रंग मैं रंग जाना इसलिए होली के दिन भांग पिया जाता है भांग का मतलब है भांग को जितना घोटोगे उतना नशा चढ़ता है ।
इसलिए कहा जाता अपना घोट तो नशा चडे अपने अंदर में जो ज्ञान है उसको घोट ना है आत्मा परमात्मा की याद और उनके ज्ञान का जितना चिंतन करते हैं कहा गया है गुरु नानक जी ने कहा है नान खुमारी नानका चढ़े रहे दिन रात तो बातों में भांग पीने की बात नहीं है परमात्मा की याद और ज्ञान को जीवन में अपनाने के बाद जिससे हम आत्माओं को परमानेंट नशा चढ़ता है जिसको जिसके लिए कहा जाता है सभी नशो में नुकसान सिवाय एक नशे के और होली में कृष्ण जी की झांकी भी सजाया जाता है इसका मतलब है कि हम सब आत्मा है परमात्मा की याद में पवित्र बनेंगे तो राधे कृष्ण की सतयुग दुनिया में जा सकते हैं राजयोग मेडिटेशंन सीखने के लिए राजिम मे पिटाई बंद रोड आमापारा में स्थित ब्रह्माकुमारी ईश्वरी विश्वविद्यालय राजिम में अवश्य पधारें ओम शांति टाइम है सुबह 7:00 से 11:00 एवं शाम को 5:00 से 8:00 बजे तक है।
