हमारे उत्सव और परिधान हमारी सांस्कृतिक धरोहर।

सुरेन्द्र मिनोचा:

मनेंद्रगढ़ :- हमारे उत्सव और परिधान हमारी सांस्कृतिक धरोहरों के साथ-साथ हमारी अपनी पहचान है,जिसे सुरक्षित रखना हर सामाजिक व्यक्ति का धर्म है।यही कारण है कि सांस्कृतिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा इनके स्वस्थ आयोजनों की परंपरा इसे नई पीढ़ी को स्थानांतरित करने  का अवसर देती है।

रोजी रोटी के लिए विदेश में रहने वाले भारतीय भी अपने सांस्कृतिक उत्सव साथ लेकर चलते हैं और समय आने पर उसे मिलजुल कर बनाते हैं। आज संस्थागत रूप से आयोजित यह रंगो का उत्सव उसी का परिणाम है।उक्त आशय के विचार संबोधन संस्था के संरक्षक सांवलिया प्रसाद सर्राफ ने संबोधन एवं वनमाली सांस्कृतिक संस्था द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित फाग गीतों की होली 2023 कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर गायक एवं लेखक रमेश गुप्ता को होली की टोपी से सम्मानित करते हुए कार्यक्रम को शुभकामनाएं देते हुए व्यक्त किए।


निदान सभागार मनेंद्रगढ़ में संबोधन साहित्य एवं कला विकास संस्थान तथा वनमाली सृजन केंद्र मनेंद्रगढ़ द्वारा संयुक्त रुप से होली के अवसर पर  आयोजित “संबोधन के रंग, वनमाली के संग”कार्यक्रम में फाग गीतों की होली में अपने स्वरचित गीत आओ प्रीतम प्यारे के गीत की प्रस्तुति के साथ रमेश गुप्ता ने होली के माहौल को रंगीन बनाने की शुरुआत की।शास्त्रीय एवं सुगम संगीत के वरिष्ठ कलाकार सरदार हर महेंद्र सिंह ने सांवलिया प्रसाद सर्राफ के होली गीत “डारन डारन लद गए फुलवा, छाई बसंत बहार रे”की संगीतबद्ध प्रस्तुति ने पूरे मंच को गायन में स्वर मिलाने हेतु बाध्य कर दिया।

हास्य व्यंग और ठहाकों से सराबोर करने की कोशिश में होली के रंगों के साथ श्यामसुंदर निगम के कुंडलिया और पुष्कर तिवारी के व्यंग ने श्रोताओं को बांधे रखा.गंगा प्रसाद मिश्र के गीत “खेलेंगे हम होली” को हर महेंद्र सिंह ने स्वर दिया और तालियां बटोरी।
वनमाली सृजन केंद्र मनेंद्रगढ़ के संयोजक एवं कार्यक्रम संचालक बीरेंद्र श्रीवास्तव ने होली के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई देते हुए मातृशक्ति को याद किया और ऐसे शब्दों में परिभाषित करने के लिए कल्याण चन्द्र केशरी को आमंत्रित किया।केशरी की कविता “पुत्री बनकर जन्म लिया और जनक सुता सम्मान दे गई” कविता ने लोगों को नारी शक्ति के सामाजिक संबंधों में नारी शक्ति के सशक संबंधों का एहसास कराया।पहली बार मंच पर साधना द्विवेदी ने अपनी गीत प्रस्तुत कर महिला दिवस 2023 की सार्थकता को सिद्ध किया। वहीं रचनाकार वर्षा श्रीवास्तव एवं किरण वर्मा की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को ऊंचाइयों प्रदान की।


साहित्यकार गिरीश तिवारी की रचना “तितलियों के पंख सरीखे  प्यारे रंग गुलाल के” कविता प्रस्तुति ने माहौल में होली के रंग भरे।वही गौरव अग्रवाल की श्रंगारिक “चलो आज सपनों की दुनिया में तुमसे मैं अब तुम्हारी ही बातें करूंगा” रचना ने लोगों  का मन बांध लिया।
लेखक एवं गायक कलाकार सतीश द्विवेदी ने शब्दों को रंगों में डूबा कर अपनी गीत प्रस्तुति से शमां बांध दिया,वहीं गायक शैलेश जैन एवं नरोत्तम शर्मा ने होली के प्राकृतिक बदलाव को शब्दों मे बंधे गीत “तुम्हारे ताल मिले नदी के जल मे” की प्रस्तुति ने होली के इस आयोजन को ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
आयोजन के संदर्भ में अपने विचार रखते हुए संबोधन के वरिष्ठ सदस्य निरंजन मित्तल ने कहा कि समाज मे आपसी प्रेम और भाईचारे संबंधों को जोड़ने और इसे बनाए रखने की परंपरा ही हमारे ऐसे आयोजनों का उद्देश्य होता है इसे महसूस करते हुए  संबोधन निरंतर ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन के प्रति सजग रहती है।
देर शाम तक आयोजित इस कार्यक्रम में अरविंद श्रीवास्तव, गौरव अग्रवाल, शैलेश जैन, कवि विजय गुप्ता, पुष्कर तिवारी, नरोत्तम शर्मा, नरेंद्र श्रीवास्तव, गिरीश तिवारी, सतीश द्विवेदी, कल्याण चंद केसरी एवं वीरेंद्र श्रीवास्तव जैसे साहित्यकारों एवं कलाकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।