रिपोर्टर संतोष सोनकर
राजिम :- ज्यो ज्यो होली की तिथि नजदीक आती जा रही है होलीयारा माहौल बनता हुआ दिखाई दे रहा है। होली का पर्व प्रयाग नगरी में मनाने का अपना अलग अंदाज है जिस तरह से वृंदावन, मथुरा, बरसाने की होली पूरी दुनिया में विश्व विख्यात है ठीक उसी भांति भगवान राजीवलोचन की नगरी में होली खेलने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और भगवान के साथ में रंग गुलाल उड़ा कर होली का मजा लूटते हैं छत्तीसगढ़ में राजिम की होली अत्यंत प्रसिद्ध है। इस त्यौहार को मनाने के लिए रंग गुलाल एवं पिचकारी की दुकानें सज गई है इस बार सिलेंडर गुलाल आए हैं यह एक डब्बे में बंद है इन्हें उड़ाने के लिए हाथ से प्रेशर देना पड़ता है हल्की सी टच के बाद गुलाल उड़ता है जो देखते ही बनती है इसे सिलेंडर गुलाब का नाम दिया गया है और आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। विक्रेता नहीं बताया कि इस बार ₹30 से लेकर ₹400 तक के पिचकारी उपलब्ध है। मुखड़ा भी अलग-अलग प्रकार के उपलब्ध है इनमें से राक्षसों के अलावा आधुनिक डिजाइन के कार्टून पर आने वाले दृश्य को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। होली में आवाज देने वाले मोहरी भी इस बार आए हुए हैं। इन्हें बजाने के लिए फूंक मारने की आवश्यकता होती है। बाजार में आने वाले केमिकल युक्त गुलाल के अलावा हर्बल गुलाल की भी बिक्री इस बार होगी इनकी भी दुकान है अभी सजी नहीं है लेकिन महिला समूह इनका निर्माण किए हैं आजकल में ही हर्बल गुलाल की दुकानें भी लग जाएगी। छुटपुट आ रही नगाड़ों की आवाज अभी तक नगाड़े की आवाज छुटपुट ही आ रही है। चौक चौराहे पर नगाड़े लेकर बच्चे से लेकर बड़े भी बैठ रहे हैं लेकिन यदा-कदा ही यह दृश्य देखने को मिल रहा है। बताया जाता है कि आपसे दो दशक पहले फागुन लगते ही नगाड़े बजने शुरू हो जाते थे परंतु अब इनके प्रति रुझान कम हुआ है दूसरी और देखा जाए तो अन्य माध्यमों से लोग होली गाना को बहुत ज्यादा पसंद करते हैं। महिला पुरुष खूब झूमते, नाचते हैं। अभी तक पूर्व वर्ष की भांति होली पर नए-नए गीत आने की भी जानकारी नहीं मिली है दुकानों पर बजने वाले लाउडस्पीकर या फिर डेक होली का माहौल बनाते हैं वह भी कम सा नजर आ रहे हैं। होली के लिए लकड़ी इकट्ठा करने रूझान हुआ कम, पहले के पिक्चर होली जलाने के लिए लकड़ियां इकट्ठा करने के लिए लोग जैसे ही शाम होते दल के दल लकड़ी लाने में ही लग जाते थे इस दौरान लकड़ियां चोरी होने के अंदेशा के चलते लोग रखवारी भी करते थे समय के साथ साथ इस तरह का अब माहौल समाप्त हो गया है अब सीधे लकड़ी टाल से लकड़िया मंगाई जाती है और होली जलाते हैं। आपसी भाईचारा एवं सद्भावना तथा प्रेम को दर्शाने वाला होली के पर्व की तैयारियां इस बार भी अच्छी सी होती दिखाई दे रही है क्योंकि घरों की साफ-सफाई एवं रंग रोगन का कार्य तेज गति से चल रहा है।
7 को जलेगी होली 8 को खेलेंगे रंग गुलाल, जानकारी के मुताबिक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त होलिका दहन 7 मार्च को होगा और 8 मार्च को होली खेली जाएगी। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 6 मार्च को शाम 4:17 पर होगी और इसका समापन 7 मार्च को शाम 6:09 पर होगी। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 7 मार्च मंगलवार को शाम 6:24 से रात 8:51 तक रहेगा। भद्रा काल का समय 6 मार्च को शाम 4:48 पर शुरू होगा और 7 मार्च को सुबह 5:14 पर समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि होलिका दहन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में ही जाए तो सबसे शुभ होता है इस दौरान भद्रा मुख को त्याग करके रात के समय होली का दान करना शुभ होता है।
