एएमएनएस के लाल जहर के गुब्बार से नहाने को मजबूर हैं किरंदुल से पालनार रोड के स्कूली बच्चे।

दंतेवाड़ा /रणवीर सिंह चौहान

( बच्चों की सफेद ड्रेस स्कूल पहुचने तक हो जाती सुर्ख लाल )

( बिना पानी के खाली पानी टैंकर दौड़ता है सड़कों पर )

( प्रशासन की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को ठेंगा दिखाती कंपनी )

( कंपनी के लाल जहर से गिर सकता है बस्तर का शिक्षा ग्राफ )

किरंदुल : – दंतेवाड़ा जिले के सुदूर अंचल बैलाडीला में स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्सेलर मितल निप्पन स्टील इंडिया लिमिटेड अपने पूर्व नाम एस्सार स्टील की स्थापना के समय से ही विवादों में रहते हुए अखबारों की सुर्खियों में बने रहती है ।विदित है कि बस्तर के लाल गलियारों में विकास वैसे भी देरी से पहुँचता है ।जहाँ एक तरफ जिला प्रशासन आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत भारत देश के भविष्यो नन्हे मुन्ने बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगाने के लिए कृतसंकल्प होते हुए निरंतर बस्तर में शिक्षा के विकास के लिए कई योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की कोशिश में लगे रहते हुए कई प्रतिशत सफलता की सीढ़ी भी चढ़ रहा है ।परंतु आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र चोलनार से लेकर पालनार ग्राम की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आती है ।

चोलनार ग्राम से लेकर पालनार होते हुए मसेनार तक आर्सेलर मित्तल की कंपनी के लोह अपशिस्ट को भारी भारी वाहनों के माध्यम से कंपनी से लेकर मसेनार तक परिवहन किया जा रहा है ।उल्लेखनीय है कि किरंदुल से लेकर पालनार तक सड़क किनारे करीबन 18 स्कूल है जिस कारण कई स्कूली बच्चों को सड़क किनारे चलते हुए या सड़क पार कर विद्यालय जाना होता है । सड़क पर सरपट दौड़ रही वाहनों से उड़ती लाल धूल के गुब्बारों से बच्चों की सफेद ड्रेस स्कूल पहुँचते तक शुर्ख लाल रंग में तब्दील हो चुकी होती है ।इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि निरंतर सड़को पर दौड़ती भारी वाहनों से उड़ती लाल धूल से स्कूली बच्चों के साथ साथ ग्रामीणों में भी बीमारी एवं छोटे बच्चों के साथ कभी भी सड़क हादसों का भी भय बने रहता है । साथ ही हफ्ते में एकआध बार ही पानी का छिड़काव किया जाता है । इस संबंध में जनप्रतिनिधि रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि कंपनी के इस लाल जहर से ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही बर्बादी को लेकर कंपनी की दबंगाई के कारण जनप्रतिनिधि आंखे मूंद लेते हैं । जिस कारण कंपनी के लाल जहर को समाचारपत्रों में स्थान नहीं मिल पाता है कम्पनी की पहुंच,दबंगई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही कोई पत्रकार,जनप्रतिनिधि या ग्रामीण कम्पनी व ठेकेदार और ट्रांसपोर्टर द्वारा की जाने वाली इस मनमानी पर आपत्ति उठाता है प्रश्न खड़े करता है पुलिस अमला तत्काल प्रभाव से सक्रिय हो कर डराने धमकाने में लग जाता है- एक प्रकार से यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि से इस कार्य से संभंधित ठेकेदारों, कम्पनी एवं ट्रांसपोर्टरों को अघोषित रूप से विशेष सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है जिससे यहाँ के जनप्रतिनिधि आम जनता यहाँ तक की मीडिया भी अपना सर ना उठा सके ।

बयान :- जितेन्द्र ताम्रकार – नगर निरीक्षक थाना किरन्दुल- मेरे द्वारा शिकायत मिलने पर पिछले माह कार्यवाही की गई थी जिसके अंतर्गत 20 से अधिक गाड़ियों का चालान भी किया गया था मैं इस वक्त कई दिनों से नगर से बाहर हूँ किरन्दुल पहुंचते साथ उचित कानूनी कार्यवाही की जावेगी।

ग्रामीणों के बयान: – सिन्हा पटेल पारा पालनार- हम गांव वालों का जीना दुश्वार हो चुका है,दिन भर हम व गांव के बच्चे लौह चूर्ण खाते है घर व मकान धूल से अटे पड़े हैं भोजन तक करना दुश्वार हो चुका है गांव वाले या मैं कुछ बोले तो पुलिस पहुंच जाती है।
जोगा राम ….ग्रामीण .. यहाँ सब मिलीभगत से चल रहा है । कुछ बोलो तो धमकी दी जाती है ।