हुनर किसी परिचय का मोहताज नहीं – संजय सुरीला
राजिम। कलाकार अंधेरे में सूर्य की रोशनी जैसे होते हैं जिसे छुपाया नहीं जा सकता कला अभाव में भी पलकर पल्लवित और पुष्पित होती है। हुनर किसी परिचय का मोहताज नहीं जो ज्यादा शोर नहीं करते उसकी खामोशी रूपी गुण भी तहलका मचाती है। हर बाधाओं को लांघने की जो रखते हैं हिम्मत फलता उन्हीं की चूमती हैं कदम। इसी भावो को लेकर राजिम माघी पुन्नी मेला के चैथे दिन शानदार प्रस्तुति से पूरे राजिम क्षेत्र के लोगों और दर्शकों के दिलों को अपनी सुमधुर आवाज से स्पर्श करने वाले संजय सुरीला एंड उसकी टीम ने धूम मचाया। कार्यक्रम पश्चात मीडिया सेंटर में भेंट वार्ता के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि उनका बहुत ही गरीबी में पालन पोषण हुआ है। जहाँ सन के लिए कोई स्थान नही था, दादा नाना के सामने मैं यूँ ही कुछ फिल्मी गीत गुनगुना देता, तो वे मुझे प्रोत्साहन में पीठ थपथपाते और कहते बहुत अच्छा गा लेते हो और अठन्नी देते वही से शुरू हुआ
गाने का जज्बाकृ। उन्होंने आगे बताया कि पहले मैं आर्केस्टा गुरु मदन सिंह ठाकुर के यहाँ समान लाने ले जाने का काम करता था, वो मुझे एकाध बार मौका दे देते थे गाने का। फिर सोचा ऐसे में तो गुजारा मुश्किल है और वही से लगन लगी खुद के दम पर गीतों की दुनिया मे छा जाने की। लोक गीत में रुचि थी इसलिए कम से कम 20-22 कंपनियों के चक्कर काटा तब जाकर छः माह कटनी में पहली बार टन टनाटन टूरी तोर बाल खुला खुला…. में गाने का मौका मिला उसके बाद से कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार एक के बाद एक कार्यक्रम मिलते गया।
वर्ड रिकॉर्ड बना कर्मा कुहकी गीत
मेरा सौभाग्य हैं शासकीय योजना के अंतर्गत राजनांदगांव में एक साथ 26 हजार लोगों को .कर्मा कुहकी गाबो मांदर के ताल म में गीत गाने और नृत्य का अवसर मिला ….जो वर्ड रिकार्ड बना……।
संगीत समझदारी का काम
उन्होंने बताया कि खैरागढ़ में दो तीन माह संगीत की शिक्षा ली, तब समझ आया संगीत समझदारी का काम है। बीस सालों से लगातार छतीसगढ़ के हर जिलों के साथ पड़ोसी राज्यो महाराष्ट्र, झारखंड मध्यप्रदेश यू.पी. उड़ीसा एवं अन्य राज्यों में प्रस्तुति दे चुके हैं। जिसे लोगो का प्यार और बाहर सराहना मिली। राजिम माघी पुन्नी मेला में पहली बार आने का मौका मिला है। यहां की व्यवस्था बहुत अच्छी है जो वास्तविक कलाकार है। राज्य सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार स्थानीय कलाकारों को मौका दे रही है, जो बहुत ही सराहनीय कदम है। इससे कलाकारों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
अश्लील गीत की मनाही है घर में
घर में शिक्षित माहौल हैं। अश्लील गाने की मनाही हैं इसलिए भोजपुरी गीत में नही जाता, इस पावन भूमि में हमारी टीम का पहला प्रोग्राम है यहां हमे बहुत मान सम्मान मिला है, मंच का सम्मान होता है क्या परोसना है। इस बात का ध्यान हर कलाकार हो होना चाहिए। राज्योत्सव भी कई बार प्रोग्राम दिए है हमारी सफलता पीछे मित्रो दोस्तो और भाइयों का हाथ हैं।
बिना गुरु के ज्ञान नहीं
चर्चा के दौरान बताया कि यूट्यूब में 34 हजार सब्सक्राइबर है। मात्र एक साल हुए हैं। वीडियो अपलोड किये लेकिन मैं खुश हूं। दौलत भले ही न हो पर पब्लिक का प्यार तो है। हम छत्तीसगढ़ की गाथा को कभी नहीं भूलेंगे संगीत में आगे जाने के लिये रियाज करना बहुत जरूरी है। बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिलता।
हौसले हो बुलंद तो मुट्ठी में मुकाम हैं
यहां आने से पहले थोड़ा मन मे डर थापता नही लोगो को पसंद आयेगा या नहीं फिर खुद को मजबूत करना पड़ा कुछ कर दिखाने का हौसला लेकर जुट गये लोगो का दिल जीतने और परिणाम सबके सामने है यहाँ की संस्कृति में सब कुछ संग्रहित हैं जिसे सभी देखने आते हैं।
