मैनपुर :- गरियाबंद जिले के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व अंतर्गत जंगलो के भीतर से इन दिनो तोता की तस्करी बड़े पैमाने पर होने की जानकारी मिल रही है और तो और इन तोताओ को तस्करो के द्वारा बकायदा लग्जरी वाहनो मे भरकर बड़े शहरो ले जाया जा रहा है जहां प्रति नग तोता 1000 से 1500 रूपये मे बिक रहा है और वन विभाग बेखबर है। पिछले 4-5 वर्ष पहले वन विभाग द्वारा बड़ी कार्यवाही करते हुए गरियाबंद जिले मे तोता तस्करो को पकड़ने मे सफलता प्राप्त किया था। वहीं एक माह पहले कुल्हाडीघाट जंगल क्षेत्र से भी तोता तस्करी करते एक व्यक्ति को वन विभाग ने पकड़ा था, मिली जानकारी के अनुसार इंसानी शौक और कमाई के चलते तहसील मुख्यालय मैनपुर के वनांचल पहाड़ी क्षेत्र से तस्करो द्वारा लगातार किये जा रहे तस्करी के चलते तोता विलुप्ति के कगार पर पहुंचते जा रहा है

वन्य जीवो के तस्करी पर पूरी तरह से प्रतिबंध होने के बावजूद भी मैनपुर, इंदागांव, उदंती, तौरेंगा, सीतानदी टाईगर रिजर्व क्षेत्र के जंगलो से तोता की तस्करी बड़े पैमाने पर होने लगी है, इन दिनो तोता सहित विभिन्न प्रजाति के पक्षियो की तस्करी गांवो से होकर प्रदेश के कई मैदानी इलाको के अलावा शहरो तक हो रही है। लोगो के शौक के कारण ही छत्तीसगढ़ राज्य की राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना आज विलुप्ति के कगार पर है जहां इसी शौक के चलते जंगलो से रंग बिरंगे पक्षियो की तस्करी निरंतर हो रही है, साथ ही अब पहले की अपेक्षा क्षेत्र के जंगलो से पक्षियो के शिकार के चलते विभिन्न सुरीली आवाज लिये चहकने वाली पक्षियां विलुप्त के कगार पर पहुंच चुकी है। वहीं वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने कुछ वर्ष पहले क्षेत्रो मे बटेर बेचने के खिलाफ कही कहीं कार्यवाही की थी परन्तु छोटे वन्य जीव गुप्त तरीके से जंगलो से होकर शहरो तक पहुंच रहे है और एक गिरोह के रूप मे लोग इसकी तस्करी को अंजाम दे रहे है, वहीं विभाग वनांचल क्षेत्रो मे दर्जनो तोता बेचने खरीदने वालो के खिलाफ कोई कार्यवाही नही कर पा रही है। पेड़ो से पक्षियो को निकालने के लिए तस्कर सीधे पक्षियो के घोसले मे नशीले पदार्थ रखकर या फंदे के सहारा लिया जा रहा है, वन्य प्राणियो को बचाने के लिए कड़े कानून तो है लेकिन उनका क्रियान्वयन नही हो पा रहा है, तोता मे कई प्रकार के प्रजाति पाई जाती है जो घरो मे शौक के अनुरूप व चिड़ियों के मीठे बोल के कारण पिंजरो मे कैद रख पाला जाता हैं। लोगो के इसी शौक के चलते ही गुपचुप तरीके से तोते की बड़ी तस्करी का जखीरा गांवो से लेकर शहरो तक हो रहा है, बांस के छोटे छोटे टोकरियों मे रखकर इन्हे लगातार बाहर भिजवाया जा रहा है। मांग अधिक होने के कारण तोता की कीमत ग्रामीण क्षेत्रो मे पांच सौ रूपये व शहरो मे हजारो रूपये तक पहुंच गई है पहाड़ी व जंगली क्षेत्रो मे रहने वाले ग्रामीणो ने बताया कि क्षेत्र मे फरवरी से अप्रेल माह मे बड़ी तादात पर तोता, करण सुआ, मंझाली व छोटे सुआ (तोता) की तस्करी की जाती है जो वनो मे कम, लोगो के घरो मे पिंजरे मे ज्यादा दिखते है, तोतो को पकड़ने व तस्करी की गति ऐसी ही रही तो आने वाले दिनो मे जंगली क्षेत्रो के वनो से तोते पूरी तरह से खत्म हो जायेगें पिछले कुछ दिनो से तोता तस्कर क्षेत्र मे काफी सक्रिय नजर आ रहे है, बताया जाता है कि इसे बकायदा लक्जरी वाहनो मे भरकर बडे शहरो तक पहुंचाया जाता है और इसे ऊचे कीमत पर बेचा जाता है अभी तोता निकलना प्रारंभ हुआ है ऐसे में इसकी तस्करी पर तत्काल लगाम लगाये जाने की जरूरत है। क्या कहते हैं वन अधिकारी वन परिक्षेत्र अधिकारी कुल्हाडीघाट अमर सिंह ठाकुर ने बताया पिछले दिनों तोता तस्करी करने वाले को पकड़ कर उनके खिलाफ कार्रवाई किया गया है। यदि और शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई किया जाएगा।
