महाशिवरात्रि में पहुंच रहे मुख्यमंत्री क्या राजिम जिला की करेंगे घोषणा।

राजिम :- माघी पुन्नी मेला में इस बार मुख्यमंत्री का दोबारा आगमन हो रहा है। पहली बार इन्होंने मेला शुभारंभ अवसर पर पहुंचे। दूसरी बार महाशिवरात्रि में पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का राजिम के प्रति स्पष्ट रूप से स्नेह देखा जा रहा है जिसकी चर्चा प्रतिदिन हो रही है। वैसे भी गत महीने अंतर्राष्ट्रीय संत प्रदीप मिश्रा रायपुर में प्रवचन कर रहे थे तब उन्होंने वहां की सभा में राजिम का गुणगान किया। इन 2 महीनों में मुख्यमंत्री का आगमन चार बार हो जाएगा।

वह भेंट मुलाकात कार्यक्रम में 5 और 6 दिसंबर को पहुंचे थे तब यही रात्रि विश्राम भी किया तथा भगवान राजीवलोचन एवं कुलेश्वर नाथ महादेव के दर्शन किए थे उसके बाद 7 जनवरी को राजिम भक्तिन माता जयंती समारोह में अपनी उपस्थिति दिलाई थी फिर माघी पुन्नी मेला और अब महाशिवरात्रि को आने की बात क्लियर है। यह पर्व 18 फरवरी दिन शनिवार को है। वह समापन समारोह में विचार उद्बोधन भी करेंगे। बार-बार मुख्यमंत्री का आगमन राजिम के प्रति प्रेम स्नेह को दर्शा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बने तब मात्र 16 जिले थे उसके बाद 17 जिले और बन गए।इस तरह से कुल 33 जिला हो गए हैं माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में 36 जिला होंगे। तीन जिला और बनना है। राजिम को जिला बनाने की मांग बहुप्रतीक्षित है। यहां लाखों जनता को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जरूर राजिम को जिला का दर्जा प्रदान करेगी। जानकारी के मुताबिक संत कवि पवन दीवान बहुत प्रयास किए लेकिन उनके सपना अधूरा रह गया। हो सकता है इसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पूरा करेंगे जिस तरह से मां कौशल्य की भूमि चंद्रखुरी को विकसित करने के लिए बार-बार प्रयास किया गया अंततः मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें मान दिलाई। धर्म क्षेत्र राजिम की अपनी अलग पहचान है। पूर्व मंत्री एवं विधायक धनेंद्र साहू छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कद्दावर राजनेता है वह मेले के हर मंच पर अपने उद्बोधन स्पष्ट रूप से कहते हैं कि राजिम मध्य भारत का बहुत बड़ा तीर्थ स्थल रहा है उस समय ओड़िशा महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ के लोग बड़ी संख्या में आस्था श्रद्धा एवं विश्वास की भूमि राजिम में धार्मिक क्रियाकलाप के लिए पहुंचते थे। आज भी राजिम के प्रति पूरे देश भर की श्रद्धा की बनी हुई है। विदेश से भी बड़ी संख्या मे सैलानी पहुंच रहे हैं। मेले पर होने वाली भीड़ धर्म नगरी की इतिहास बनाने का काम कर रही है। माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार इन्हें जिला का दर्जा दे दे तो विकास की धारा फूट पड़ेगी और यहां की जनता शासन की योजनाओं से सीधे जुड़ जाएंगे वैसे भी देश में जितने भी बड़े तीर्थ स्थल है सभी जिला मुख्यालय के रूप में अस्तित्व में आ चुके हैं लेकिन राजिम का दुर्भाग्य है की अभी तक इन्हें जिला का दर्जा नहीं मिल पाया है, जबकि यह विधानसभा मुख्यालय है। यहां से चुनकर जाने वाले प्रतिनिधि अविभाजित मध्यप्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद एक बार कैबिनेट मंत्री बने। जानकारी के मुताबिक इस बार मुख्यमंत्री के आगमन को जिले का दर्जा देने की उम्मीद को देखा जा रहा है यह तो 18 फरवरी को ही क्लियर हो पाएगा।