शक्ल, अक्ल और कद है बराबर,करचिया के जुड़वाँ भाइयों की जन्म से लेकर अब तक की कहानी भी है दिलचस्प।

देवभोग:- आज तक आपने फिल्मों में दो जुड़वाँ भाइयों के हमशक्ल होने के किस्से देखे होंगे। आज हम आपको ऐसे हमशक्ल भाइयों से अवगत करवाने जा रहे है। जिनकी शक्ल तो एक है लेकिन भगवान ने उनका कद,अक्ल और शरीर की बनावट भी ऐसा बनाया हो। मानो वे दोनों एक ही इंसान है । करचिया के रहने वाले ये दो भाई छायासंत और छायाबंत हूबहू एक दूसरे के हमशक्ल नजर आते है। गॉव के लोग या परिवार के लोग भी कई बार असमंजस की स्थिति में पड़ जाते है कि छायासंत कौन है और छायाबंत कौन उम्र में छायाबंत अपने छोटे भाई छायासंत से 5 मिनट बड़ा है।13 फरवरी 2003 को जन्मे इन दोनों भाइयों को पाने के लिए माँ-बाप ने कई देवीधाम में माथा टेका। तो कई जगह हवन पूजन करवाकर संतान प्राप्ति के लिए व्रत भी रखा। माँ बाप के नित्य पूजा पाठ का प्रतिफल ऐसा रहा कि करचिया के विक्रम बिसी और मालती बिसी के घर जुड़वाँ पुत्रों का जन्म हुआ। बचपन से ही एक दूसरे के हमशक्ल भाइयों को आज भी गॉव वाले पहचानने में धोखा खा जाते है। वहीं दोनों जुड़वाँ भाइयों के बीच प्यार भी ऐसा है कि दोनों भाई कम दोस्त ज्यादा नजर आते है। इसी का परिणाम है कि दोनों भाई आज भी ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बने हुए है।आपसी सहमति से ही लेते है निर्णय-: छायासंत और छायाबंत में इतना प्यार है कि दोनों जुड़वाँ भाई हर बात को एक दूसरे से बिना शेयर किये रह नहीं पाते  या ज़ब भी कोई निर्णय लेना होता है तो दोनों आपस में चर्चा कर उन बातों को अपने माँ-बाप को बताते है जन्म से ही एक साथ पले बड़े दो भाइयों में इतना ज्यादा लगाव देखने को मिलता है कि दोनों गॉव में भी एक साथ घूमते है, जबकि बाहर घूमने जाने या अन्य गॉव जाने पर भी दोनों एक दूसरे के साथ ही कही भी बाहर जाते है। तबीयत खराब होने पर बड़े भी रह गया था भूखा-: छायासंत अपने बड़े भाई छायाबंत के विषय में बताता है कि बचपन में ज़ब दोनों दसवीं क्लास में पढ़ते थे, उस दौरान उसका तबीयत ख़राब हो गया था। और माँ बाप भी घर से बाहर गए थे, उसी दौरान तीन किलोमीटर की दूरी तय कर भाई उसको इलाज के लिए देवभोग लेकर गया था। वहीं इलाज करवाकर लाने के बाद बड़ा भाई उसी के पास दिन भर बैठा रहा बड़े ने तब तक कुछ नहीं खाया, ज़ब तक छोटे का तबीयत ठीक नहीं हुआ। उस दौरान दोनों भाइयों ने देर शाम साथ भोजन किया था।