माटी के फूल के मुख्य गायक कलाकार बिसेलाल साहू पहुंचे दैनिक अजय उजाला खबर गंगा के संयुक्त कार्यालय।

राजिम :- कला में संसार की खूबसूरती को समाहित करने की अद्भुत क्षमता होती हैं। कला भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं, जों अपने अंतस में उठ रही विभिन्न विचारों को मूर्त रूप प्रदान करती हैं। कला वहीं श्रेष्ठ होती हैं जो जनमानस की जीवनशैली जों जीवंत रूप में प्रस्तुत करें। किसी जाति-मजहब भाषा बोली में बंधी नहीं होती जों ह्रदय को झंकृत कर बाधाओं को पार कर व्याकुल मन को तृप्त करतीं हैं उदास लम्हों में उत्साह के रस भरकर परम्पराओं का श्रृंगार करती हैं सत्य को सृजित कर अपनी संस्कृति को सहेजकर लोगों की दूषित मानसिकता को मिटाकर आत्मा को परिष्कृत करती हैं कला में अद्भुत शक्ति होती हैं, मानवीय संवेदनाओं रुचि कल्पनाओं एहसास को अपनी परिस्थिति के अनुसार नई दिशा देकर संसार की सारी खूबसूरती को समाहित कर लेने की, अद्भुत क्षमता होती हैं जो विशाल जनमानस को अपनी ओर सहज ही आकर्षित करती हैं। ऐसे ही माटी के पुत्र एक छोटे से गांव से निकलकर अपनी हुनर से लोगों के दिल में जगह बनाने में सफ़ल हुए माटी के फूल रामधुनी मंच के कलाकारों ने माघी पुन्नी मेला के छठवें दिन सांस्कृतिक मंच क्रमांक दो में जीवंत झांकी नृत्य गायन की जबर्दस्त प्रस्तुति दी जो जनसमुदाय के बीच चर्चा का विषय रहा दैनिक अजय उजाला साप्ताहिक ख़बर गंगा के कार्यालय में मंच के अध्यक्ष मुख्य गायक बिसेलाल साहू बेलटुकरी मुलाकात करने पहुंचे जहां रिपोर्टर सरोज कंसारी से चर्चा करते हुए बताया की इस मंच की स्थापना 1984 में किया गया।वर्तमान में इसमें बीस सदस्य हैं

अब तक छत्तीस़ढ के अलावा उड़ीसा महाराष्ट्र और कई स्थानों पर कार्यक्रम दिए हैं। जिसमें धार्मिक झांकी को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत करते हैं हमारा उद्देश्य लोगों को सत्संग का महत्व समझाने के साथ ही भक्तिभाव का प्रचार कर समाज में हो रही अमानवीय प्रवृति को रोकना हैं,क्योंकी भक्ति ही मुक्ति का मार्ग हैं बिना धर्म का दामन थामे मानवीय व्यवस्था बनाए रखना संभव नहीं झांकी के माध्यम से बताया जाता है की धर्म की रक्षा के लिए माता स्वयं इस धरा पर अवतार लेती हैं और दुराचारियों का नाश करतीं हैं। माटी के फूल नामकरण पर प्रश्न के जवाब में कहा की छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा एक किसान बेटा ही करता हैं तब जाकर अन्न उत्पन्न होता हैं मेहनत से ही धरती माता हरी भरी होती हैं। माटी मे जन्म लेते हैं और इसी में मिल जाते हैं। राजिम मंच में कार्यक्रम देते आठ नौ साल हो गए लेकिन इस बार मंच में प्रस्तुति देकर बहुत सूनापन लगा क्योंकि संध्याकालीन कार्यक्रम के लिए बने मुख्यमंच मे कार्यक्रम देकर स्वर्ग में पहुंचने की अनुभूति होती थी वह एक गरिमामयी मंच है वहां की सजावट और लाइटिंग में कार्यक्रम देना सौभाग्य की बात हैं सांस्कृतिक मंच दो में दिन मे कार्यक्रम होते है दर्शक कम तो बहुत फिका लगता हैं। शासन व्यवस्था से यही आग्रह हैं की कलाकार के लिए एक ही भव्य मंच बनाएं और सभी को सम्मान बराबर दें जैसे पहले होता था क्योंकि राजिम माघी पुन्नी मेला का सांस्कृतिक मंच कलाकारों का संगम स्थल हैं। सप्ताहिक खबर गंगा-दैनिक अजय उजाला के प्रधान संपादक अजय देवांगन साप्ताहिक ख़बर गंगा की स्थानीय संपादक सुश्री पिंकी साहू, रिपोर्टर सरोज कंसारी ने उन्हें शील्ड प्रदान कर सम्मानित किए।