मेला–(भाग-५)
राजिम के पावन माटी–

राजिम के पावन माटी ल मोर परनाम हे,
जगा-जगा म बिराजे इंहा श्रीभगवान हे|
इंहा संस्कृति अऊ सभ्यता के परमान हे,
सच कहिथों राजिम ह,सरग के समान हे||
राजिम लोचन अऊ कुलेश्वर,हरिहर विराजे हे|
गरीबनाथ अऊ सोमेश्वर,बिगड़े काज साजे हे||
माता राजिम के महिमा ह महान हे —
महानदी के तीर म बैठे,माता तुलजा भवानी हे|
बस्ती बीच महामाया,तरिया म शीतला रानी हे||
ब्रम्हा,विष्णु,शिव दत्तात्रेय भगवान हे–
मामा -भांचा,दानेश्वर के,शोभा ह देखो भारी हे|
राम जानकी,जगन्नाथ के,महिमा अद्भुत न्यारी हे||
प्रेम मूरत बसे राधाकृष्ण भगवान हे–
माँ काली चंडी,भैरव,गंगा गीता अऊ सावित्री हे|
देवभूमि के दर्शन करावे,इंहा वेदमाता गायत्री हे||
धर्म ध्वजा फहरावत श्री हनुमान हे—-
लोमस ऋषि भूणेश्वरीशरण इंहा करिस आराधना|
पवन दीवान,कृष्णारंजन,करिन साहित्य साधना||
पण्डित सुंदर लाल के कर्म महान हे—–
रचनाकार:- श्रवण कुमार साहू, “प्रखर”
शिक्षक/साहित्यकार, राजिम, गरियाबंद (छ.ग.)
