फिंगेश्वर :- कोविड-19 के कारण बच्चों की लर्निंग लॉस की पूर्ति करने के उद्देश्य से मिशन लर्निंग के तहत जिला शिक्षा अधिकारी डी एस चौहान के मार्गदर्शन एवं जिला मिशन समन्वयक श्याम चंद्राकर के सहयोग से गरियाबंद जिले के पांचों विकासखंड में कक्षा 6 से 8 एवं 9 से 12 वी के शिक्षकों का विषय वार दो दिवसीय उपचारात्मक शिक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला के अंतर्गत शिक्षकों का क्षमता वर्धन/उन्मुखीकरण किया गया।इस प्रशिक्षण का लाभ जिले छठवीं से बारहवीं तक अध्यापन सभी शिक्षक ले रहे है। विकासखण्ड गरियाबंद में कार्यक्रम के प्रथम दिवस के अवसर पर शुभारंभ सहायक जिला परियोजना अधिकारी बुद्ध विलास सिंह ने मां सरस्वती के छाया चित्र पर दीप प्रज्वलित व श्रीफल फोड़कर किया। तत्पश्चात उपचारात्मक शिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहायक जिला परियोजना अधिकारी बुद्ध विलास सिंह ने कहा कि उपचारात्मक शिक्षण मूलतः एक उत्तम शिक्षण विधि है जो छात्रों को अपने मानसिक स्तर के अनुरूप प्रगति करने का अवसर देती है। उपचारात्मक शिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों की भाषा संबंधी अशुद्धियों को दूर करकेकक्षा के अन्य विद्यार्थियों के बहुमुल्य समय को नष्ट होने से बचाना एवं ज्ञान प्राप्ति के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों एवं समस्याओं को दूर करना है। बच्चों की समग्र विकास की अवधारणा को साकार करने समग्र शिक्षा परियोजना कार्यालय रायपुर हर संभव प्रयास कर रही है। लर्निंग आउटकम आधारित यह उपचारात्मक शिक्षण प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के स्तर अनुसार निर्धारित पाठ्यक्रम में आवश्यक दक्षताए और अध्ययन कौशल विकसित करना है। कोरोना काल में बच्चों की लर्निंग लॉस की पूर्ति करने में उपचारात्मक शिक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यालय में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर बच्चों की बेहतर और सुखद भविष्य के लिए अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। वहीं कार्यक्रम के अंत मे सभी विकासखंड के शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्रोत समन्वयक एवं मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षण हेतु सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किए। इस अवसर पर जिला मिशन समन्वयक श्याम चंद्राकर, ए पी सी मनोज केला अधिकारी, ज्ञानेन्द्र जिला नोडल अधिकारी, मास्टर ट्रेनर अजय यादव, ओमप्रकाश वर्मा, उमेश यादव उपस्थित थे।

