राजिम:-छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति सदा ही समृद्धशाली रहीं हैं यह ऋषि-मुनि और तपस्वियों की धरा हैं।जहां अनेकता में एकता के दर्शन होते हैं।यहां के लोगों के जेहन में कला रची बसी हैं। संस्कृति एक सीखा गया व्यवहार हैं जो पीढी दर पीढी हस्तांतरित होता हैं। लोक संस्कृति जो बहुत ही सहज-सरल और अनुकरणीय होती हैं जिसमें बनावटीपन नहीं होता यह किसी व्यक्ति विशेष के लिए न होकर संपूर्ण समाज की संपत्ति होती हैं।छतीसगढ़ी भाषा और बोली में बहुत ही मिठास होता हैं जिनकी सादगी में ही प्रेमपूर्ण व्यवहार का श्रृंगार होता हैं।

सांस्कृतिक आस्था का केंद्र बिंदु धार्मिक नगरी में छत्तीसगढ के कोने-कोने से प्रसिद्ध कलाकार आकर इसकी माटी की महिमा का बखान कर रहे हैं,और उन्हें इस विशाल मंच पर अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का अवसर प्राप्त हो रहा हैं। राजिम माघी पुन्नी मेला के चतुर्थ दिवस सांस्कृतिक मंच क्रमांक दो में प्रसिद्ध पांडवानी गायिका गंगाबाई मानिकपुरी शुक्लाभाटा धमतरी ने पंडवानी की कापालिक शैली में शानदार प्रस्तुति दी। मंच से सीधे दैनिक अजय उजाला – खबर गंगा संयुक्त अखबार के कार्यालय पहुंची जहां रिपोर्टर सरोज कंसारी से विशेष चर्चा में बताया की विगत दस साल से राजिम के इस पावन मंच पर कार्यक्रम दे रहीं हैं। अपने पांडवानी जीवन की शुरूवात विवाह के बाद महिला मानस समूह बनाकर की और धीरे-धीरे आगे बढ़ी छत्तीसगढ के हर स्थान पर जाकर पांडवानी गायन कर चुकी हैं आगे चर्चा में उन्होंने बताया की शिरकट्टी आश्रम के ब्रम्हलीन श्री श्री 108 भुनेश्वरी शरण जी महराज के मार्गदर्शन में लखन यादव धौराभाठा को गुरु बनाकर यह पांडवानी की शिक्षा प्राप्त की।
पंडवानी जीवन जीने का सलीका सिखाती हैं जिसमें बिल्कुल भी फूहड़ता नहीं होती संकट के समय में भी जुबान पर भगवान के नाम आते हैं वर्तमान शासन में शासन-व्यवस्था से नाराजगी जाहिर करते हुए कहा की अभी दो मंच बनाया गया हैं।जो कलाकार के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया को प्रदर्शित करती हैं।मंच क्रमांक दो के कलाकारों को कम मानदेय दिया जाता हैं जिससे उनके आने-जाने का खर्च भी पूर्ण नहीं होता महोत्सव स्थल पर बने मुख्यमंच के कलाकारों को पर्याप्त सम्मान के साथ दुगुनी राशि मिलता हैं जिससे अन्य कलाकारों के भावना को ठेस पहुंचती हैं पूर्व सरकार की कार्यशैली बेहतर थी एक मंच में छोटे-बड़े सभी का सम्मान किया जाता था। सरकार से हमारी यही अपेक्षा है कलाकारों के लिए पेंशन की व्यवस्था हो जिससे हमें आर्थिक परेशानी से न जूझना पड़े। और सभी के साथ समान व्यवहार करें । आज के बच्चे मोबाईल में पागल हैं हम अपनी पुरातन परंपरा को अनपढ़ होते हुए भी जीवित रखे हैं। हम चाहते हैं की इस विधा को युवा पीढी आगे बढ़ाए और छत्तीसगढ महतारी का मान बढ़ाए। नए कलाकारों के लिए यहीं संदेश है की एकलव्य की तरह ध्यानमग्न होकर शिक्षा ले अपने दिमाग को स्थिर रखे कोई भी ऐसे फ़ूहड़ शब्दों का प्रयोग न करें जिससे छत्तीसगढ की संस्कृति धूमिल हो सभ्य आचरण करें और कठिन परिश्रम करें निश्चित ही सफ़लता मिलेगी सप्ताहिक खबर गंगा- दैनिक अजय उजाला के प्रधान संपादक अजय देवांगन, खबर गंगा की स्थानीय संपादक सुश्री पिंकी साहू, सुश्री सरोज कंसारी, कल्याणी कंसारी ने पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका आत्मीय सम्मान किए।

