राजिम :- रविवार को मांघ पूर्णिमा के लिए प्रदेश के प्रसिद्ध प्राचीन प्रयाग नगरी राजिम का दृश्य बदला हुआ नजर आ रहा है। जिस त्रिवेणी संगम पर रेत या फिर पानी होते थे वहां पर अब दुकानें लग गई है आने जाने के लिए लंबे चौड़े आकार का रास्ता दिखाई दे रहे हैं, मंडप बना हुआ है। कहीं पर झांकी तो कहीं डोम जो देखते ही बन रही है। मुक्ताकाशी मुख्य महोत्सव मंच को तैयार करने का काम अभी चल रहा है जो कि इनका काम बहुत लेट से शुरू हुआ है। कल 4 फरवरी को देर रात तक उन्हें पूर्ण किया जा सकता है। बैकग्राउंड के रूप में एक बड़ा आकार का एलइडी 10.30 * 28 सेंटीमीटर लंबाई चौड़ाई का सेट किया जा रहा है। कलाकार इस मंच पर जैसे ही प्रस्तुति देंगे उनके आकार को बढ़ाकर एलईडी स्क्रीन परोसने का काम करेंगे। पूर्व वर्ष की भांति मुख्य मंच पर कोई ज्यादा काम नहीं दिख रहा है ऊपर के सिढ़ी वाले दर्शक दीर्घा पर डिस्टेंशन ज्यादा दूरी का है। राम वन गमन पथ के अंतर्गत आने के कारण गेरूवा पत्थर से सिढ़ी की संख्या को कम कर दिया गया है। बावजूद इसके जबरदस्त लुकिंग दिख रहे हैं। दर्शकों के बैठने के लिए अलग- अलग ब्लॉक बनाए गए हैं। सामने ही एक बड़ा सा डोम तैयार किया गया है जिस पर प्रतिदिन कार्यक्रम आयोजित होंगे। राज्य स्तरीय महोत्सव मंच पर प्रदेश के हजारों कलाकार शाम 6:00 बजे से लेकर रात्रि 11:00 बजे तक प्रस्तुति देंगे वही रामायण की भी प्रस्तुति होने की जानकारी मिल रही है यह आयोजन सुबह 11:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक होते हैं। नदी में अलग- अलग सड़क बनाए गए हैं। रेत की सड़कों पर अलग-अलग तीन लेन है पहला रेत की सड़क, दूसरा फर्शी पत्थर का तथा तीसरा रेत का ही है। यह सड़कें पंचेश्वर नाथ महादेव मंदिर से लेकर कुलेश्वर नाथ महादेव मंदिर तथा लोमस ऋषि आश्रम तक, कुलेश्वर नाथ महादेव के गोलाकार होते हुए महानदी पर से होते सीधे अटल घाट तक बनाए गए हैं इस तरह से 800 मीटर के इस सड़क को पैकेट में रेत भरकर बॉर्डर बना दिया गया है। इस बार मेला में झांकी भी देखने को मिलेगा पूर्व वर्ष की भांति झांकी का स्वरूप अलग होगा लेकिन आकर्षक ढंग से इन्हें मूर्त रूप दिया जा रहा हैं। संगम आरती घाट पर स्ट्रक्चर खड़ा कर पंडाल लगाए गए हैं। गंगा आरती के समय प्रतिदिन भजन कीर्तन होगा। आरती का दृश्य अत्यंत अलौकिक होता है जिसे देखने सुनने बाद दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होते हैं। प्रदेश सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में जानकारी देने के लिए विभिन्न स्टाल लगाए गए हैं मंडप आकार पर लुक दिया जा रहा है। स्नान कुंड की तैयारियां भी लगभग पूरी हो गई है। कई बार गंदगी के कारण दर्शनार्थियों को स्नान करने में बड़ी दिक्कत होती है। वह गंदगी ना हो इस बात का ख्याल रखना बहुत जरूरी हो जाता है वैसे पीएचई विभाग शौचालय का निर्माण तो करती है लेकिन फिर भी गंदगी करने वालों पर पैनी नजर होनी चाहिए। बता देना जरूरी है कि मेला में सीसीटीवी कैमरा इस बार बड़ी संख्या में लगाए जा रहे हैं इससे पूरी मेला में होने वाले क्रियाकलाप पर नजर रखी जाएगी। यह आयोजन तीन जिलों को मिलाकर होते हैं जिनमें से धमतरी जिला के कलेक्टर लगातार दौरा कर रहे हैं और गरियाबंद जिला के कलेक्टर भी प्रतिदिन मेले का निरीक्षण करते हैं उनके अथक प्रयास से एक अच्छा स्वरूप में दिखने लगा है। रायपुर जिला के द्वारा भी अनेक कार्य कराए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक गरियाबंद जिला में कुल 16 दाल भात केंद्र की अनुमति प्रदान किए गए हैं लेकिन अभी तक इन्हें चावल उपलब्ध नहीं कराया गया है हो सकता है शनिवार को चावल का स्टॉक इन्हें प्राप्त हो। ऐसे ही धमतरी एवं रायपुर जिला क्षेत्र में दाल भात केंद्र खोले जा रहे हैं जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन प्राप्त हो सके। लक्ष्मण झूला पर भीड़ को कवरेज करने के लिए इस बार आने और जाने के लिए अलग- अलग रूट तैयार किए हैं झूला के रास्ते के बीच में लोहे के खंभा बढ़ाकर उसमें रस्सी लगा दिए हैं तथा बीच-बीच में स्टॉपेज के लिए व्यवस्था कर दी गई है इससे भीड़ ना बढ़ पाए। बताना होगा कि लक्ष्मण झूला का उद्घाटन पिछले साल 16 मार्च को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया था। अभी से पुलिस व्यवस्था मुस्तैद दिख रही है। इधर मेला मैदान में मीना बाजार तथा अन्य दुकानों की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही है कल तक पूरी तरह से रेडी हो जाएंगे। जानकारी के मुताबिक शनिवार को ही मीना बाजार का उद्घाटन होगा और इसी के साथ ही झूला, मौत का कुआं, रेंजर झूला, बाजार इत्यादि लेनदेन के लिए प्रारंभ हो जाएंगे।

