देवभोग :- गर्मी की शिद्दत के साथ ही तापमान में निरंतर बढ़ोत्तरी होने लगी है। इसका सीधा प्रभाव जलस्तर पर पड़ा है। ब्लॉक भर के अधिकांश ताल तलैया सूखने लगे है। जलस्तर में कमी और ताल-तलैया के सूखने से इंसान ही नहीं पशु पक्षी और मवेशियों की भी मुसीबत बढ़ गई है। दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों और जंगली इलाकों में पीने के पानी के लिए बनाए चुआं आदि भी सूख चुके हैं। इससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी तथा पशु पक्षियों जीव-जंतुओं के लिए पीने के पानी का संकट गहरा गया है। गर्मी के कारण जलस्तर पाताल की ओर समाने लगी है। कुंआ नदी, नाले, आदि जलाशय सूख रहे हैं। कई इलाकों का तालाब, कुंआ अभी से ही सूख चूकी है। सूख चुकी हैं लबालब रहने वाली नदियां।

1. इलाके की तेल नदी -देवभोग में बढ़ते तापमान ने अभी से आमजनों की परेशानी बढ़ाना शुरू कर दिया है। गर्मी की तपिश के कारण तालाब, कुंए, नदी व हैंडपंप सभी सुख चले हैं। क्षेत्र की जीवनदायिनी नदी कही जाने वाली तेल नदी भी सूखने की कगार पर है।2. सूखने लगा ऋषिझरन का झरना-वनाँचल क्षेत्रों से घिरा ऋषिझरन का झरना भी गर्मी के दस्तक देते ही सूखने के कगार पर आ गया है, इस झरने के पानी से आसपास रहने वाले गॉव के ग्रामीण और जंगल में रहने वाले जीव जन्तु अपनी प्यास बुझाते थे। वहीं झरने का पानी सूखने से आसपास के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है, ग्रामीण तो कही से भी अपनी प्यास बुझा लेते है, लेकिन वनों में रहने वाले जानवर पानी की तलाश में भटककर गॉव तक जाने को मजबूर हो जाते है।यहां बताना लाजमी होगा कि तेल नदी बरसात में पानी से लबालब रहती है। इससे निरंतर जल प्रवाहित होता रहता है। ब्लॉक के कई गॉव के लोगों के लिए यह नदी जीवनधारा के समान रहती है। मगर जनवरी माह समाप्त होते-हेाते यह नदी पूरी तरह से सूख चुकी है। साल के छह माह जब यह नदी भारी मात्रा में जल प्रवाहित करती है उस समय इस जल का समुचित प्रबंधन व संरक्षण हो तो साल के बाकी के समय में यह लोगों के लिए जीवनदायी हो सकती है। 3. तालाब भी देने लगे जवाब- तेल नदी के अलावा ब्लॉक के बीस गॉवो के कई तालाब भी सूखने की कगार पर है। गर्मी के मौसम में यह पूरी तरह से सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है। व्यापक जलप्रबंधन के अभाव सहित पानी के समुचित बहाव नहीं होने से नदी के किनारों में बेतरतीब गंदगी जमा हो गई है। नतीजा यह हुआ है कि नदी बस सूखने ही वाली है।इस बार पानी के लिए मचेगी हाहाकार-गर्मी के दस्तक देते ही जिस तरह इस बार तेल नदी सूखने की कगार पर है, अंचल के कई तालाब सुख चुके है, कुछ गॉवो में हैंडपम्प भी जवाब देने के कगार पर है, उसे देखते हुए जानकार दावा कर रहे है कि इस बार मार्च और अप्रैल के महीने में पानी की समस्या विकराल रूप लेकर आमजनों के सामने खड़ी हो जायेगी। यहां बताते चले कि बरही की लाइफ लाइन मानी जाने वाली बरही नदी बरसात के समय भारी मात्रा में जल प्रवाहित करती रहती है। ओड़िसा से होते हुए यह नदी बरही में मिल जाती है। ओड़िसा के बीस से ज्यादा गॉव के लोगों के साथ ही यह नदी बरही और आसपास के पांच से ज्यादा गॉव के लोगों के लिए यह काफी कारगर रहती है, मगर गर्मी के मौसम में यह पूरी तरह से सूख जाती है। इस नदी में भी जलप्रबंधन व संरक्षण योजनाओं की कमी है। इस नदी में चेकडेम नहीं होने के कारण पानी का संरक्षण नहीं हो पा रहा है।

