शहर के बाहर से हैवी गाड़ियां निकालने उठी बाईपास सड़क की मांग ।

राजिम :- प्राचीन धर्म नगरी राजिम में लगातार आवागमन के दबाव बढ़ने के कारण शहर के अंदरूनी भागों से होकर चलने वाली हैवी गाड़ियों के चलते राहगीरों की परेशानियां बढ़ती जा रही है। यही स्थिति रही तो नगरवासियों का सड़क पर चलना कठिन हो जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इन्हें नगर पंचायत तो बना दिया लेकिन विधानसभा मुख्यालय के नाम से चर्चित राजिम शहर में अभी तक बाईपास सड़क का निर्माण नहीं हो पाना राहगीरों को मुश्किल दौर से गुजरने के लिए विवश कर दिया है। वर्तमान में शहर के लोगों की प्रमुख मांग बन गई है। सरकार शहर के बाहर से होकर बाईपास रोड का निर्माण करें, जिससे ना सिर्फ शहर के लोगों को बल्कि बाहर से पहुंचने वाले यात्रियों को भी सोहलियत होगी। इस संबंध मेंजनपद पंचायत फिंगेश्वर के पूर्व अध्यक्ष राघोबा महाडिक ने बताया कि कुछ माह पहले बाईपास सड़क के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर खुद जिलाधीश को ज्ञापन सौपे हैं जिसमें विभिन्न संगठन द्वारा शीघ्र बाईपास सड़क अस्तित्व में लाने की मांग की है। इनमें व्यापारी संघ, सर्राफा संघ, किराना व्यापारी संघ, पार्षद लेखाराम महोबिया, सूरज पटेल, ओमप्रकाश आडिल, पूर्णिमा चंद्राकर, विनोद सोनकर इत्यादि हैं। महाड़िक ने आगे कहा कि मार्ग के चौड़ीकरण की भी मांग उन्होंने की है।नगर पंचायत के सभापति पुष्पा गोस्वामी ने कहा कि बाईपास सड़क के में पूर्ण समर्थन में हूं शहर के विकास एवं बढ़ते आवागमन को कवरेज में लाने के लिए शीघ्र बाईपास सड़क का निर्माण किया जाना चाहिए।जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ग्रामीण के पूर्व महामंत्री डीके ठाकुर ने कहा कि राजिम नगर की ऐतिहासिक, गरिमा व भविष्य में इसके चहुमुखी विकास के मद्देनजर एक व्यवस्थित मास्टर प्लान बनाए जाने की आवश्यकता है। बाईपास रोड किसी भी नगर के मास्टर प्लान का अभिन्न और अनिवार्य अंग होता है राजिम नगर के हो रहे निरंतर विस्तार, सघन होती जनसंख्या घनत्व के साथ राजिम नवापारा की सड़कों पर बढ़ते अप्रत्याशित यातायात दबाव के चलते स्थानीय जनता व जनप्रतिनिधियों के द्वारा बाईपास सड़क की मांग पिछले एक दशक से की जा रही है। मामले पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और चुप्पी समझ से परे है। जन भावनाओं के अनुरूप इस हेतु यथाशीघ्र ही सामूहिक पहल की आवश्यकता है। राजिम भक्तिन माता समिति के अध्यक्ष लाला साहू ने कहा कि राजिम अत्यंत प्राचीन शहर है हमेशा यहां यातायात का दबाव बना रहता है। देश विदेश से श्रद्धालु एवं पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। व्यापारिक दृष्टिकोण से भी राजिम का अपना एक अलग विशेष महत्व है। शहर के अंदरूनी भागों के सड़कें की चौड़ाई कम है। हैवी गाड़ियों को निकालने में ड्राइवर को बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। यह शहर चारों तरफ से जिला मुख्यालय महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद एवं राजधानी रायपुर के मध्य में हैं। बाईपास रोड बन जाने से लोडिंग व अनलोडिंग गाड़ियां बाहर से ही निकलेगी। नतीजा शहर के अंदर में आवागमन का दबाव कम होगा तथा व्यवस्थित भी रहेगा।अधिवक्ता महेश यादव ने कहा कि शहर में लगातार जनसंख्या का दबाव बढ़ रहा है। 15 दिन के होने वाले माघी पुन्नी मेला में भीड़ की कोई सूरत नहीं होती है। हर पांच पांच मिनट में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। इन दिनों शहर के बाहर से होकर जिसमें नवापारा बस स्टैंड से बेलाही पुल होते हुए नवागांव चौबेबांधा पुल पारकर राजिम पहुंचा जाता है। शहर के बाहर से होकर ही जिला मुख्यालय गरियाबंद जाने के लिए इस मार्ग का उपयोग करते हैं। क्यों न सरकार स्थाई रूप से बाईपास सड़क का निर्माण कर आवागमन को व्यवस्थित करें। साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल ने कहा कि प्रदेश के बहुत से शहर में जनसंख्या के साथ ही सुविधाएं भी बढ़ रही है परंतु राजिम में लगातार जनसंख्या तो बढ़ी है उसके हिसाब से विकास को पंख लगने में शिथिलता देखी जा रही है। बाईपास निर्माण तो अत्यंत जरूरी है इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ध्यान दें। केंद्र के कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी, राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के सांसद चुन्नीलाल साहू, क्षेत्रीय विधायक अमितेश शुक्ला इस मांग को गंभीरता से लेते हुए इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करें।