भव्य कलश यात्रा के साथ श्री सशस्त्र चंडी महायज्ञ का हुआ शुभारंभ 11 दिनों तक चलेगा महायज्ञ ।

सुकमा – श्री सशस्त्र चंडी महायज्ञ का शुभारंभ शनिवार को भव्य कलश शोभायात्रा के साथ सुकमा जिला मुख्यालय में प्रारम्भ हुआ। कलश यात्रा की शुरूवात विश्वकर्मा मंदिर से शुरू हुई। आतिशबाजी, नृत्य दलों व सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु जनों के शोभायात्रा नगर के मुख्य सड़क से होते हुए यज्ञ स्थल राजवाड़ा मेला परिसर पहुंचा। शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु जन शामिल हुए।

भक्तिमय वातावरण से 11 दिनों रहेगा सराबोर :- शनिवार से श्री सशस्त्र चंडी महायज्ञ का शुभारंभ भव्य शोभायात्रा के प्रारम्भ हुआ। वहीं 11 दिनों तक चलने वाले इस श्री सशस्त्र चंडी महायज्ञ को लेकर भक्तों में काफी उत्साहित है। वही इस महायज्ञ को संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश से पंडित का आगमन हुआ है। वहीं 11 दिनों तक पूजा-अर्चना विधि विधि विधान के साथ संपन्न किया जाएगा। इस आयोजन से सुकमा सहित पूरे जिले में इस महायज्ञ को लेकर भक्तों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसकी वजह से 11 दिनों तक भक्तिमय माहौल से श्रद्धालु जन सराबोर रहेंगे।

मां काली का किया गया आह्वान :- बस स्टैंड परिसर स्थित श्री श्री मां महाकाली शक्ति कानन मंदिर में आयोजन समिति के द्वारा विशेष पूजा अर्चना कर मां काली की स्तुति की वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए धूप दीप प्रज्वलित कर पूजा अर्चना की गई। श्री श्री मां महाकाली मंदिर सुकमा के हृदय स्थल पर बसा हुआ है, महाकाली मंदिर लोगों का आस्था का बड़ा केंद्र है।

विशेष आकर्षण का केंद्र रहा झांकी :- भव्य शोभायात्रा के दौरान हुआ सुकमा भक्ति में रंग में रंगा हुआ देखने को मिला। शोभायात्रा में जगत जननी मां दुर्गा के नौ रूपों का साथ ही भगवान शंकर सहित अन्य देवी-देवताओं की झांकी तैयार की गई थी। साथ ही छत्तीसगढ़ आइडल संदीप राव बंदिश म्यूजिकल ग्रुप धमतरी द्वारा भजनों की मनमोहक प्रस्तुति, ध्रुवा नृत्य दल, नाचा दल, मोहरी बाजा आदि शोभायात्रा में शामिल थे। वहीं आंध्र प्रदेश की आतिशबाजी ने भी एक अलग ही शमा बांध रखा था।

यज्ञ क्यों आवश्यक है :- कार्यक्रम में पहुंचे पंडितों से हमने बात की तो उन्होंने बताया कि यज्ञ क्यों आवश्यक है, उन्होंने कहा कि भगवान ने यज्ञ के साथ मनुष्य को उतपन्न कर जीवन पर्यंत यज्ञ से सम्बंधित रहने की उसे आज्ञा दी है, इसलिए मनुष्य का संपूर्ण जीवन सदा यज्ञमय होना चाहिए। गीता 3/15 के अनुसार यज्ञ हिन्दू जाति का धर्म है, यज्ञ साक्षात भगवान का स्वरूप है, यज्ञ, दान, तप तीनो मनुष्य को पावन करती है।