सुकमा-कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा में राष्ट्रीय बांस मिशन योजना किसानों को बांस से संबंधित एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगाया गया था। समान किसानों ने बांस के साथ कटौती किस प्रकार से उगाई बनती है, और यह परिणाम परिणाम का परिणाम है इसके बारे में विस्तार से कृषि वैज्ञनिकों ने किसानों को जानकारी दी। वहीं किसान अपनी जानकारी को लेकर काफी उत्साहित थे और आने वाले दिनों में इस परिणाम का निर्धारण करने की योजना बनाना शुरू कर दिया है।
गुरुवार को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, सुकमा (मुरतोण्डा) मे पुनर्गठित राष्ट्रीय बॉस मिशन योजनान्तर्गत दिवसीय प्रशिक्षण आयोजन किया गया। जिसमे मुख्य अतिथि डॉ. आरके प्रजापति (फारेस्ट शाखा), इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, उपसंचालक पीआर बघेल, वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी रामचन्द्र राव, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी कमल गावडे, कृषि वैज्ञानिक राजेन्द्र प्रसाद कश्यप, विरेन्द्र कुमार चौहान, आकांक्षा भदौरिया सहित कृषि विज्ञान केन्द्र, सुकमा के समस्त कर्मचारी एवं बलीराम नेगी, भूतपूर्व सरपंच, प्रगतिशील किसान जेएल मौर्य एवं जिले के विभिन्न गांवों के कृषक मित्र तथा लगभग 80 कृषकों की उपस्थिति में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कृषि वैज्ञानिक राजेन्द्र प्रसाद कश्यप ने बॉस के पौधों एवं अन्य फसलों व सब्जियों में लगने वाले रोग एवं उनके प्रबंधन की जानकारी दी गई।
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प्रगतिशील कृषक जेएल मौर्य ने बताया कि बांस के उत्पादन के बारे में कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा विस्तृत से जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि बांस कम समय में तैयार होने वाला अच्छा मुनाफा देने की जानकारी मिली है।अगर किसान अपने खेतों में खाली जगह में भी इसका उपज लेना शुरू करें तो किसानों के लिए लाभदायक होगा। उन्होंने कहा कि बांस का उपयोग जन्म से लेकर मृत्यु तक हर व्यक्ति के लिए आवश्यक रूप से लगता है, ऐसे में आने वाले समय में बांस हमारे किसान भाइयों के लिए निश्चित तौर पर लाभदायक होगा।
वर्जन। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके प्रजापति ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बांस कम समय में तैयार होने वाला फसल है। वही बांस का पौधा एक बार लगाने पर 40 साल तक उत्पादन देता है। उन्होंने बताया कि बांस की पौधा 5 साल के बाद उत्पादन देने लगता है, किसानों के लिए यह अच्छा मुनाफा देने वाला फसल है। उन्होंने बताया कि लगातार जंगलों की कटाई जारी है, ऐसे में कम समय पर तैयार होने वाला यह बांस का पौधा पर्यावरण के लिए भी काफी लाभदायक है, और आर्थिक रूप से किसानों के लिए भी काफी लाभदायक है।
