कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा में राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के अंतर्गत जिले के कृषको के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

बेमेतरा। बेमेतरा के विज्ञान केंद्र में जिले के कृषको के आय बढ़ाने के लिए बांस की उन्नत किस्म खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई, क्योंकि बांस एक सर्वोपयोगी वनसंपदा है क्योंकि इसकी ऊँचाई एवं वृद्धि अतुलनीय है। बांस एक से 3 माह में अपनी वृद्धि प्राप्त कर लेता है। बांस की खेती खेतों में, बाड़ियों, ब्यारा आदि में किया जा सकता है, जो पर्यावरण तथा भूमि संरक्षण के साथ-साथ उत्पादन से कृषकों को लाभान्वित भी करता है। बांस की खेती के बारे में जागरूकता लाने हेतु पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा द्वारा ग्राम झाल के कृषक सभागार में आज गुरुवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न गांवों के कृषक उपस्थित थे। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पादप आण्विक जीव विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग से प्रमुख वैज्ञानिक डाॅ. जेनु झा के द्वारा बांस की जातियों, प्रजातियों की विशेषताओं के बारे में विस्तृत चर्चा की गई। डाॅ. जेनु झा के द्वारा बताया गया कि बैंबुसा बल्कोआ किस्म सबसे उपयोगी किस्म है जो वाद्य यंत्र, घर व अन्य कार्यों के लिए उपयोगी है। बैंबुसा टुल्डा किस्म पेपर पल्प बनाने का काम आता है तथा बैंबुसा न्यूटन का अगरबत्ती बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इस तारतम्य में वैज्ञानिक श्रीमती शिल्पा चंद्रवंशी ने बांस की उन्नत काश्त तकनीक, रखरखाव, खाद व सिंचाई प्रबंधन तथा कटाई की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के वरष्ठि वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री तोषण कुमार ठाकुर के द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ की जलवायु बांस के उत्पादन के लिए उपयुक्त है तथा भविष्य में बांस का उत्पादन कृषि के अलावा अतिरिक्त आय का साधन होगा। बांस की ग्रामीण जीवन में उपयोगिता पर डाॅ. प्रज्ञा पाण्डेय द्वारा जानकारी प्रदान की गई तथा प्राकृतिक खेती अंतर्गत बीजामृत तथा जीवामृत बनाने की विधि का प्रदर्शन किया गया साथ ही उनके द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पोषण अनाज वर्ष 2023, पोषण लघु धान्य के अंतर्गत कोदो, रागी व अन्य लघु धान्य के उत्पादन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। डाॅ. एकता ताम्रकार के द्वारा बांस में कीट प्रबंधन तथा डाॅ. चेतना बंजारे के द्वारा बाँस के फसल कटाई के बाद उपयोग के बारे में कृषकों को विस्तृत जानकारी दी। डाॅ. चेतना बंजारे तथा डाॅ. हेमन्त साहू द्वारा कृषकों को कृषि विज्ञान केन्द्र, बेमेतरा की नर्सरी में उत्पादित टमाटर के पौधे का वितरण किया गया।