*सिंघु बार्डर पर अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सदस्यों ने निकाली रैली*

*सिंघु बार्डर पर अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सदस्यों ने निकाली रैली*

दिल्ली की विभिन्न सीमाओं में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सदस्यगण सिंघु बार्डर में जारी तमाम विरोध प्रदर्शनों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
आंदोलन के 89वें दिन सिंघु बार्डर पर रैली निकाल प्रदर्शन किया इस दौरान कॉरपोरेट परस्त किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी काले कानून वापस लो, एम एस पी की गारण्टी कानून लागू करो, पेट्रोल डीजल की बढ़ी दामें वापस लो की नारे लगाते हुए मार्च किया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा झारखंड के संयोजक वशिष्ठ ने कहा कि 11वें दौर की चर्चा के बाद मोदी सरकार आंदोलनकारी किसानों के साथ चर्चा करने अब तक तैयार नहीं हुआ है बल्कि इसके विपरीत भाजपा के मंत्रियों व कार्यकर्ताओं को गांव गांव में भेजकर कानून की अच्छाई बताने के नाम पर किसान आंदोलन को तोड़ने हर संभव प्रयोग कर रहा है। जब किसान यह कानून नहीं चाहते हैं तो क्यों दबावपूर्ण लागू किया जा रहा है इससे विश्व व्यापार संगठन और कॉरपोरेट घरानों की मोदी सरकार पर कितना भारी दबाव है यह समझ आता है साथ ही मोदी केवल कॉरपोरेट घरानों के ही हित साधने में ही लगा हुआ है।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव और छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संयोजक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार अपने लाये हुए कानून को।किसानों के हित मे बता रहा है तो फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून लागू करने में आनाकानी क्यों कर रहा है। मोदी जी वास्तव में यदि किसान हितैषी है तो एम एस स्वामीनाथन आयोग के सिफारिशों के अनुरूप फसल का डेढ़ गुणा न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करे और इस पर खरीदी की गारण्टी दे, सभी राज्यों में सरकारी कृषि उपज मंडियों की व्यवस्था को सुनिश्चित करें, जब किसानों को उनके उपज का लाभकारी मूल्य मिलेगा तो क्यों किसान किसी व्यापारी के साथ करार खेती करेगा। सरकार के पास पेट्रोलियम मंत्रालय है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब कच्चे तेल की कीमतें कम है पर भी देश मे पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों पर सरकार कोई नियंत्रण कर पा रही है। ऐसे परिस्थितियों में जब खाद्यान्न की व्यवस्था कॉरपोरेट घरानों के हाथों में केंद्रित हो जाएगा तो बनावटी खाद्य संकट पर सरकार क्या नियंत्रित कर पायेगी। इस सवाल का जवाब गाँव में जाने वाले नेताओं के पास भी नहीं है। इसलिए यह आंदोलन दिन ब दिन और भी व्यापक होते जा रही है। कार्यक्रम में प्रेमदास, विजेन्द्र कुमार, राम रहीस, बैजनाथ, सुरेश कुमार, दीपक कुमार, मीनू, उर्मिला, अजेब सिंह, साहेब सिंह आदि उपस्थित रहे।