राज्यसभा में प्रधानमंत्री का उदबोधन लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है:- तेजराम विद्रोही*

 

राज्यसभा में 8 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसान आन्दोलन का मजाक बनाते हुए आंदोलनकारियों को आन्दोलनजीवि परजीवी कहना उनके पद के खिलाफ ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। वैसे तो वे और उनकी पार्टी के लोग अब तक जिस भाषा का उपयोग करते आए हैं उनसे अच्छी बातों की अपेक्षा भी नहीं किया जा सकता था।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव तेजराम विद्रोही ने 8 फरवरी 2021 को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वक्तव्य का निन्दा करते हुए कहा कि पहले वह विपक्ष मुक्त भारत की कल्पना के अनुरूप कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देते थे और अब जब किसान आंदोलन के द्वारा मोदी सरकार को कॉरपोरेट परस्त तथा किसान, कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी नीतियों के खिलाफ भारी विरोध व चुनौती मिल रही है तो आंदोलनकारियों को परजीवी करार दे रहा है जो गैर जिम्मेदाराना और लोकतात्रिक मूल्यों के खिलाफ है। विद्रोही ने कहा कि जब सत्ता तानाशाह बन जाता है तो उनके खिलाफ लोकतंत्र को बचाने के लिए जन पक्षधर आन्दोलन को और भी मुखर व ताकतवर बनाने की आवश्यकता होती है जो कि दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन से दिखाई देता है। मोदी को नहीं भूलना चाहिए कि वह और उनकी पार्टी भी कभी महंगाई, भ्रष्टाचार के खिलाफ हल्ला बोलता था इसका मतलब यह नहीं कि वह आन्दोलनजीवी परजीवी था। किसान आंदोलनकारियों और उनके सहयगियों को आंदोलनजीवी परजीवी कहना उनके कुंठित मानसिकता का परिचय है।