जलसंसाधन उपसंभाग फिगेश्वर की जमकर मनमानी
खराब मटेरियल से नहर लायनिंग का कार्य लगातार जारी
परमेश्वर कुमार साहू,5फरवरी 2021
गरियाबंद जिले के विभिन्न विभागों में लाखो करोड़ो की लागत से इन दिनों अनेकों विकास व निर्माण कार्य चल रहा है।लेकिन शासन के इन महत्वपूर्ण कार्यों में क्या पारदर्शिता के साथ काम हो रहा है ?या फिर क्या निर्माण कार्यों में संबंधित विभाग व ठेकेदार गुणवत्तापूर्ण कार्य कर रहा है? कहने को तो जिले में अनेक जनप्रतिनिधि है लेकिन इन जनप्रतिनिधियों को सत्ता और संगठन से दूर राजनीतिक गलियारों में आम जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। जिसके कारण शासन के महत्वपूर्ण कार्य को झांकने वाला कोई नहीं है । नतीजन ठेकादार और विभागीय अधिकारी निर्माण कार्यों में खुलेआम लीपापोती और मनमानी करने पर उतारू हो रहे हैं। ऐसा लगता है कि इन जनप्रतिनिधियो के संरक्षण में ही लीपापोती का खेल चल रहा है , यह हम नहीं कह रहे ,ये बात क्षेत्र की जनता अब कहने लगा है।
आपको बता दें कि गरियाबंद जिले के जल संसाधन उप संभाग फिंगेश्वर के अन्तर्गत सरकडा जलाशय में नहर लाइनिंग व अन्य कार्यों के लिए शासन द्वारा करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत हुआ है। लेकिन उक्त निर्माण कार्य में सारे नियमों को ताक में रखकर खराब मटेरियल का इस्तेमाल कर नहर लाइनिंग का कार्य किया जा रहा है ।विभाग के अधिकारियों व ठेकेदार की मिलीभगत से हो रहे उक्त कार्य में भारी अनियमितता व लापरवाही देखने को मिल रही है। एक तरफ सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रख उन्हे बेहतर सिंचाई सुविधा प्रदान करने करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं ।तो दूसरी ओर विभागीय अधिकारी व ठेकेदार निर्माण कार्यों में लीपापोती कर गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य कर कमीशन के चक्कर में शासन को करोड़ों का चूना लगाने में लगे हैं।उक्त जलाशय और नहर लाइनिंग कार्य में जिस तरह से ठेकेदार और विभाग मनमानी कर रहा उससे तो साफ है कि उच्च अधिकारियों और जनप्रतिंधियो के सरंक्षण के चलते उन्हें शासन के किसी भी नियम ,कानून, कायदे का तनिक भी भय नहीं है। जिसके कारण जलसंसाधन विभाग लगातार लापरवाही बरतने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है और शासन को ठेंगा दिखाने में लगे है ।
इस मामले को लेकर खबर गंगा पहले भी प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित कर उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुका है।लेकिन फिर भी उनके कान में जू तक नहीं रेंगा। संबंधित उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी खराब मटेरियल से नहर लाइनिंग का कार्य जोरों पर है ।
वहीं बताना लाजमी है की विभाग के नीचे स्तर के कर्मचारी जो मौके पर मौजूद थे वो खुद मान रहे है कि निर्माण कार्य में कमजोर मटेरियल का इस्तेमाल हो रहा है।वे कह रहा थे कि मटेरियल को नियमानुसार डाला जाए लेकिन ठेकेदार के अधीन काम करने वाले उनके नुमाइंदे मानने को तैयार नहीं।
निर्माण स्थल पर किस तरह से कार्य चल रहा है और क्या क्या गतिविधि हो रहा है ,इसके मानिटरिंग के लिए विभाग में बाकायदा अधिकारी नियुक्त है,लेकिन विभाग के अधिकारी व इंजीनियर केवल मौके पर जाकर फार्मेल्टी निभाने तक ही सीमित है ,वास्तव में क्या काम चल रहा और निर्माण कार्य में किस तरीके का समाग्री उपयोग हो रहा है इनसे उन्हें कोई मतलब नहीं। सरकडा में विभाग द्वारा जिस तरीके से घटिया निर्माण समाग्री से निम्न स्तर का काम हो रहा है ये किसी से नहीं छिपा है।इस मामले को जब जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता पी. के. आंनद को अवगत कराया गया और कार्यस्थल की तस्वीर दिखाया गया तो उन्होंने खुद स्वीकार किया कि निर्माण कार्य नियमो के विरूद्ध है उसके बाद तुरंत उन्होंने फिंगेश्वर के सब इंजीनियर कुलेश्वर जोशी को फोन कर कार्य को सुधारने और बेहतर निर्माण कार्य करने निर्देश दिए थे।लेकिन जलसंसाधन उपसंभाग फिंगेश्वर के अधिकारी और कर्मचारी अपने ही उच्च अधिकारी के आदेश को नजरअंदाज कर मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे है।तो दूसरी ओर विभाग के काम से नाराज़ किसानों ने कार्य स्थल पर खुलकर विरोध करते नजर आए।निर्माण कार्य में बहुत सारे अनियमितता उजागर होगा और जल्द ही इसका खुलासा होगा ।इसके लिए विभाग से स्टीमेट की जानकारी मांगा गया है।
कार्यस्थल पर सूचना बोर्ड नहीं
गौरतलब है कि कोई भी निर्माण व विकास कार्य स्थल पर पारदर्शिता लाने कार्य प्रारंभ होने से पहले सूचना बोर्ड लगाया जाता है ताकि आम नागरिकों को पता चल सके कि सरकार ने उनके हितो के लिए क्या काम करवा रहा है और उसके लिए कितनी बजट दिए है।लेकिन जलसंसाधन विभाग के जिम्मेदारों कि लापरवाही इस कदर है की उन्होंने कार्य प्रारंभ होने के महीनों बाद भी सूचना बोर्ड लगाना उचित नहीं समझा।विभाग और ठेकेदार की लापरवाही व भ्रष्ट नीतियों का ही नतीजा है कि वो सरकार द्वारा निर्माण कार्य के लिए दिए जा रहे राशि को छुपाकर बंदरबाट करने की नीयत से सूचना बोर्ड लगाना उचित नहीं समझा।
