पांडुका में झोलाछाप डॉक्टर नियमो के विरूद्ध कर रहे है बेधड़क क्लीनिक का संचालन, स्वास्थ विभाग कुंभकर्णी निद्रा में

पांडुका में झोलाछाप डॉक्टर नियमो के विरूद्ध कर रहे है बेधड़क क्लीनिक का संचालन
स्वास्थ विभाग कुंभकर्णी निद्रा में

परमेश्वर कुमार साहू , संभाग ब्यूरो @01 फरवरी 2021

शासन व नर्सिंग होम एक्ट के सारे नियमो की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए झोलाछाप डॉक्टर नरोत्तम साहू द्वारा बेधड़क पांडुका के चारोधाम चौक में पैथालॉजी और क्लीनिक का संचालन कर रहा है।विभाग द्वारा किसी भी प्रकार से कार्यवाही नहीं होने से इनके हौसले बुलंद हैं।उक्त झोलाछाप डॉक्टर नरोत्तम साहू द्वारा सारे नियमो को ताक में रखकर इलाज कर मरीजों से मनमाने फिस वसूला जा रहा है। यहा तक प्रतिबंधित दवाइयां भी मरीजों को देकर उसे मौत के मुंह में धकेलने से भी गुरेज नहीं कर रहे है।झोलाछाप डाक्टर व शांति पैथालॉजी के संचालक नरोत्तम साहू पैथालॉजी की आड़ में बिस्तरो वाला अस्पताल भी चला रहे है व मरीजों को ग्लूकोज बाटल व बेधड़क इंजेक्शन भी लगा रहे।बड़े हास्पिटल की तर्ज पर यांहा बाकायदा स्टाफ भी है।जो पथालाजी की आड़ में संचालित हो रहा है।इसके बावजूद भी विभाग कुंभकर्णी निद्रा में सोए है। ज़िम्मेदारो को आम नागरिकों की जान से कोई सरोकार नहीं है।

आपको बता दे कि हाईकोर्ट ने ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज पर रोक लगाने राज्य शासन को निर्देश दिए थे। लेकिन उसके बाद पांडुका,पोंड ,घटकर्रा , गाड़ाघाट सहित क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में खुलेआम झोलाछाप डॉक्टर्स मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वहीं संबंधित विभाग के अधिकारी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जिससे इनके हौंसले बुलंद हो रहे हैं। स्थिति यह है कि इनके पास कोई डिग्री है न कोई इलाज करने का लाइसेंस है ।फिर भी यह लोगों का इलाज कर रहे है। यह सब स्वास्थ विभाग की अनदेखी एवं निष्क्रियत को सामने लाता है। जब झोलाछाप डॉक्टर्स के इलाज से मरीज के साथ कोई घटना घटित होती है। तब शासन प्रसाशन और स्वास्थ विभाग जागता है और उसके बाद एक या दो झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिकों पर छापा डालकर अपनी जिम्मेंदारी से इतिश्री कर लेते है। वहीं क्षेत्र की गली मोहल्लों में संचालित झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानों पर इन दिनों बिना किसी जांच के गांवों से आने वाले मरीजों का इलाज किया जा रहा है। गली मोहल्लों में संचालित क्लीनिकों पर झोलाछाप डॉक्टर नब्ज देखकर ही दवाइयां देना शुरू कर देते हैं, जिससे मरीजों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है। वहीं मेडिकल साइंस और दवाओं के बारे में कोई जानकारी न होने के बावजूद झोलाछाप हर मर्ज का शर्तिया इलाज करने का दावा करते नहीं थकते। इनसे इलाज कराने वाले लोगों को फायदा तो नहीं होता, बल्कि उनका मर्ज और बढ़ जाता है। कई बार जान पर बन आती है। कुछ ऐसे झोलाछाप भी हैं, जो बड़े डॉक्टरों के नर्सिंग होम में कुछ दिन कंपाउंडरी करने के बाद अब क्लीनिक चला रहे हैं। वहीं मेडिकल साइंस और दवा के बारे में कोई जानकारी न होने के बावजूद झोलाछाप हर मर्ज का शर्तियां इलाज करने का दावा करते नहीं थकते। कुछ ऐसे झोलाछाप भी हैं, जो बड़े डॉक्टरों के नर्सिंग होम में कुछ दिन कंपाउंडरी करने के बाद अब क्लीनिक चला रहे हैं। वहीं स्थिति यह है कि इनके पास न तो कोई डिग्री है न कोई इलाज करने का लाइसेंस फिर भी यह लोगों का इलाज कर रहे है। यह स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी एवं निष्क्रियता को उजागर कर रहा है। जब झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से मरीज के साथ कोई घटना घटित होती है, तब शासन प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जागता है।