हकीकत
आंनद एक आभास है
जिसे हर कोई ढूंढ़ रहा है
दुःख एक अनुभव है
जो आज,हर एक के पास है
फिर भी जिंदगी में वही कामयाब हैं
जिसको खुद पर विश्वास है
आत्मा को जानें बिना
कोई,ज्ञानी तो कहलाता नहीं
आदमी जानबूझकर अनजान बनता है
जैसे सदा जिंदा रहेगा
तन है नगरी,मन है मंदिर
परमात्मा है जिसके अंदर
जग की रचना है,निराली
मत हो डांवाडोल
सतचित आंनद मूर्ति है,भगवान की
मन के मंदिर में बसा ले,घड़ी दो घड़ी
है ताकत,उसी में ही मुंह खोलने की
जो कुछ भेद,संतो से पाया है
फिर भी जिंदगी में वही कामयाब हैं
जिसको खुद पर विश्वास है
उपदेश में तो सभी कहते हैं
कभी पाप कर्म, न करना
सुनते हैं सिर्फ,आपका कान
मगर, खुद नहीं
अब जंगलों में तपन करने वाले
मंत्रो का जपन करने वाले
मन की चंचलता में
ताला कुंजी लगाने वाले
कलियुग में मिलता नहीं हैं
आंनद एक आभास है
जिसे हर कोई ढूंढ़ रहा है
दुःख एक अनुभव है
जो आज हर एक के पास है
फिर भी जिंदगी में वही कामयाब हैं
जिसको खुद पर विश्वास है
नूतन लाल साहू

