स्वार्थ साधक सरपंच संघ अध्यक्ष विगेद्र ठाकुर की काली करतूत उजागर होते ही ईमानदार सरपंचों ने छोड़ा विगेद्र ठाकुर का साथ
छुरा मुख्यकार्यपालन अधिकारी को हटाने सरपंच संघ द्वारा जारी हड़ताल समाप्त
यामिनी चंद्राकर ब्यूरो चीफ खबर गंगा
छुरा/गरियाबंद:-सत्य है कि सत्य परेशान हो सकता है किन्तु पराजित नही हो सकता यह कहावत छुरा जनपद के कर्त्तव्य निष्ठ मुख्यकार्यपालन अधिकारी रुचि शर्मा के ऊपर सटीक बैठता है जंहा जनपद पंचायत छुरा के सरपंच संघ अध्यक्ष विगेद्र ठाकुर द्वारा अपने फर्जी जीएसटी के बिलो से गोरखधंधा को बरकार रखे रहने में सबसे बडी रोड़ा बनी छुरा की कर्तव्य निष्ठ मुख्यकार्यपालन अधिकारी सुश्री रुचि शर्मा को हटाने के लिये 11 तारीख से मनरेगा ऑफिस के सामने टेंट लगाकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर विगेद्र ठाकुर के भड़कावे में आकर बैठे थे सरपंच संघ द्वारा छुरा के मुख्यकार्यपालन अधिकारी सुश्री रुचि शर्मा के ऊपर सरपंचो से बदसलुकी व कमीशन खोरी का आरोप लगाते हुए उनके स्थान्तरण की मांग राजिम विधायक व राज्यपाल से करते हुए समस्त सरपंच पंचायतो के काम छोड़ कर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठे थे लेकिन सभी सरपंचो को अपने सरपंच संघ अध्यक्ष विगेद्र ठाकुर की काली करतूत पर्दा फास होने के बाद आज हड़ताल के 9 वे दिन में इस मामले में एक नया मोड़ आ गया जो सरपंच संघ कल तक मुख्यकार्यपालन अधिकारी के ऊपर कई गम्भीर आरोप लगाए थे उन्ही सरपंचो ने आज गरियाबंद जिले के जिलाधीश को लिखे पत्र में सरपंच संघ छुरा द्वारा जनपद पंचायत छुरा के मुख्यकार्यपालन अधिकारी के ऊपर सरपंच संघ अध्यक्ष द्वारा लगाए गए सभी आरोप को मिथ्या व निराधर बताया साथ ही उक्त शिकायत का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नही होना बताया है। सरपंच संघ छुरा द्वारा जिलाधीश को दिए गए आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके द्वारा मुख्यकार्यपालन अधिकारी के ऊपर लगाए गए आरोप का खंडन करते हुए हम समस्त सरपंच गण हड़ताल समाप्त कर अपने अपने पंचायत वापस हो रहे है। उल्लेखनीय है कि सरपंच संघ द्वारा एक कर्त्तव्य निष्ठ महिला अधिकारी के विरुद्ध झूठे आरोप लगाकर हड़ताल पर बैठना और फिर उन्ही सरपंच संघ द्वारा जनपद सी ई ओ पर लगाये गए आरोप का खण्डन करते हुए सभी आरोपो को मिथ्या निराधर बताने की चर्चा छुरा नगर में जोरो पर है।
इस सम्बंध में जनपद पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि सरपंच संघ छुरा द्वारा गरियाबंद जिलाधीश महोदय को सरपंच संघ के लेटर पैड में आवेदन प्रस्तुत कर संघ द्वारा जारी हड़ताल को वापस लेना बताया जा रहा हैं।
*स्वार्थ साधक सरपंच संघ अध्यक्ष विगेद्र ठाकुर ने अपने सरपंच साथियों को रखा था धोखे में*
जो व्यक्ति सदा सत्य बोलता है अंत में जीत उसी की होती हैं अगर हम भी सत्य बोलेगे तो निश्चय ही हमारी भी जीत होगी,सत्य को परेशानी एवं कष्टों की राहों पर से गुजरना पड़ता है मगर वह परेशान होकर भी पराजित नहीं होता हैं,झूठ कुछ समय के लिए सुखदायक हो सकता है इसका लाभ मिल सकता हैं मगर यह अधिक समय तक टिका नहीं रहेगा असत्य बोलने वाले व्यक्ति के शारीरिक हावभाव दर्शाने लगते है कि यह इन्सान झूठ कह रहा हैं यही बात ग्राम पंचायत रसेला के सरपंच विगेद्र ठाकुर पर लागू हुई जब नव निर्वाचित (इस पंचवर्षीय)को धोखे में रखकर उन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री रुचि शर्मा के विरुद्ध मनघड़ंत बातों का जाल बुनकर सभी सरपंचों को भड़का दिया और तवादला का षड्यंत्र रचा लेकिन सत्य हमेशा सत्य रहता हैं कभी हार नही होती कब विगेद्र ठाकुर को आगामी मार्च माह में मनरेगा शाखा में सामग्री के होने बाले भुगतान में अपने गौरव ट्रेडर्स के फर्जी बिलो से भुगतान करवाने का कुछ सरपंचो से दावा करने लगा तो कुछ सरपंचों को बात नही जमी उन्होंने धरना स्थल पर आने से मना कर दिया तब विगेद्र ठाकुर द्वारा गैर हाजिर रहने बाले सरपंचों पर प्रति दिन एक हजार रुपये के रूप दंड रख दिया उसके बाद भी जब सरपंचो का भरपूर समर्थन नही मिला तो सरपंच पतियों को भी धरना स्थल पर बुला लिया गया तब सभी सरपंच पतियो का समर्थन नही मिला तो ग्राम पंचों को भी धरना स्थल पर भीड़ बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल कर लिया था।लेकिन स्वार्थ साधक विगेद्र ठाकुर का झूठ का पुलिंदा ज्यादा दिनों तक नही टिका और 19-01-2020को धड़ाम से गिर गया।सरपंचों को विगेद्र ठाकुर की काली करतूत पता चल गई तब सभी ईमानदार सरपंचो ने विगेद्र ठाकुर को खरी खोटी सुनाई।
*स्वार्थ साधक विगेद्र ठाकुर ने कार्यवाही से बचने चला लोमड़ी चाल ?*
छुरा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत रानीपरतेवा के सरपंच केशरी नेताम को शासकीय कार्य में लापरवाही एवं फर्जी पंचायत प्रस्ताव मामले सहित कई गंभीर आरोप शिकायत को निलम्बित कर दिया गया है यह कार्यवाही छुरा के अनुविभागीय अधिकारी सुश्री रुचि शर्मा द्वारा की गई थी वंही दूसरी तरफ ग्राम पंचायत रसेला के ही निवासी प्रार्थी सुखराम/चमारराय ठाकुर द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व छुरा के समक्ष विगत सात वर्षोँ में ग्राम पंचायत रसेला में हुये भ्रस्टाचार की सात बिंदुओं पर जाँच की मांग की विगेद्र ठाकुर द्वारा जांच रुकवाने व आवेदन बापस लेने दबाव बनाया गया लेकिन सुखराम ठाकुर जो की स्वयं एक मूलनिवासी आदिवासी हैं को फर्जी तरीके से एक्ट्रॉसीटी एक्ट ( आदिवासी एक्ट )में फसाने की धमकी दे दिया जबकि संविधान में आदिवासी के ऊपर कभी ये धारा लागू नही होती हैं।जब सुखराम ठाकुर नही माना तो ग्राम के कई लोगो को सुखराम को मनाने लिये भेजा गया तब भी सुखराम जांच करवाने की जिद में अड़े रहे दूसरी तरफ जब अनुविभागीय अधिकारी राजस्व छुरा द्वारा जांच टीम गठित कर दी तब चालक विगेद्र ठाकुर द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी के समक्ष एक प्रस्ताव रखा की ग्राम पंचायत रसेला की जांच रुकवा दो तब मैं हड़ताल बापस ले लूंगा लेकिन कर्तव्य निष्ठ अधिकारी द्वारा साफ शब्दों में कहा गया कि आप मेरा ताबदला करवाने जो उचित लगे करो लेकिन शासकीय कार्य नही रुकेंगे आप सही हो तो जांच होने दो दुध का दूध पानी का पानी हो जायेगा।
*दूसरों के प्रति नि:स्वार्थ सेवा का भाव रखना ही जीवन में कामयाबी का मूलमंत्र है:सुश्री रुचि शर्मा*
इस घटनाक्रम की जानकारी लेने पहुंचे हमारे प्रतिनिधि से चर्चा करते हुये सुश्री रुचि शर्मा जी ने कहा कि नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा से किसी का भी हृदय परिवर्तन किया जा सकता है,हमें अपने आचरण में सदैव सेवा का भाव निहित रखना चाहिए, जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होते हुए कामयाबी के मार्ग पर अग्रसर हो सकें, सेवारत व्यक्ति सर्वप्रथम अपने,फिर अपने सहकर्मियों व अपने सेवायोजक के प्रति ईमानदार हो,इन स्तरों पर सेवा भाव में आई कमी मनुष्य को धीरे-धीरे पतन की ओर ले जाती है,सेवा भाव ही मनुष्य की पहचान बनाती है और उसकी मेहनत चमकाती है, सेवाभाव हमारे लिए आत्मसंतोष का वाहक ही नहीं बनता बल्कि संपर्क में आने वाले लोगों के बीच भी अच्छाई के संदेश को स्वत: उजागर करते हुए समाज को नई दिशा व दशा देने का काम करता है, जैसे गुलाब को उपदेश देने की जरूरत नहीं होती, वह तो केवल अपनी खुशबू बिखेरता है,उसकी खुशबू ही उसका संदेश है,ठीक इसी तरह खूबसूरत लोग हमेशा दयावान नहीं होते,लेकिन दयावान लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं, यह सर्वविदित है।सुश्री शर्मा ने आगे कहा कि सामाजिक,आर्थिक सभी रूपों में सेवा भाव की अपनी अलग-अलग महत्ता है। बिना सेवा भाव के किसी भी पुनीत कार्य को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सकता। सेवा भाव के जरिए समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के साथ ही आम लोगों को भी उनके सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया जा सकता है। असल में सेवा भाव आपसी सद्भाव का वाहक बनता है। जब हम एक-दूसरे के प्रति सेवा भाव रखते हैं तब आपसी द्वेष की भावना स्वत: समाप्त हो जाती है और हम सभी मिलकर कामयाबी के पथ पर अग्रसर होते हैं। सेवा से बड़ा कोई परोपकार इस विश्व में नहीं है,जिसे मानव सहजता से अपने जीवन में अंगीकार कर सकता है।सुश्री शर्मा आगे कहती हैं कि प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हमारे अंतिम सेवा काल तक सेवा ही एक मात्र ऐसा आभूषण है, जो हमारे जीवन को सार्थक सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाता है। बिना सेवा भाव विकसित किए मनुष्य जीवन को सफल नहीं बना सकता।हम सभी को चाहिए कि सेवा के इस महत्व को समझें व दूसरों को भी इस ओर जागरूक करने की पहल करें।
सुश्री शर्मा आगे कहती हैं कि विनम्रता मनुष्य के व्यवहार को उजागर करती है। विनम्र प्रवृति का व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में आसानी से उत्कृष्ट कार्य कर सकता है,,विनम्रता ही मानव को इस संसार में सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति बनाती है,हम सभी को विनम्रता पूर्वक जीवन यापन करना चाहिए।सेवा भाव का असल उद्देश्य समाज के दबे कुचले लोगों की मदद करना है,ऐसे में हमारी एक छोटी सी पहल भी बड़े सामाजिक परिवर्तन का प्रतिरूप बनकर उभर सकती है। हम सभी को सदैव सेवाभाव के पथ पर अग्रसर रहना चाहिए।
सुश्री शर्मा का मानना हैं कि हम सभी महान कार्य तो नहीं कर सकते लेकिन नि:स्वार्थ सेवा कर अपने समाज व परिवार का नाम जरूर रोशन कर सकते हैं। हम सभी को निस्वार्थ भाव से जीवन को जीने की कला अपने भीतर विकसित करनी चाहिए। निस्वार्थ भाव रखते हुए समाज हित में लगातार कार्य करना ही मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।सेवा करने से हमेशा अच्छे संस्कार हमें मिलते हैं।जदगी में कामयाबी के लिए सेवा और सदाचार दोनों का ही बहुत बड़ा योगदान है। जो व्यक्ति सेवा और सदाचार से दूर रहता है, वह कभी सफल नहीं हो पाता,जदगी को सफल बनाने के लिए यह बड़ा मार्गदर्शक है,हम सभी को अपने जीवन में सदाचार व सेवा भाव को विकसित करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।
सुश्री शर्मा आगे कहती हैं कि जीवन का मूलमंत्र दूसरों के प्रति नि:स्वार्थ सेवा भाव रखना है। सेवा भाव के लिए विनम्रता व सहनशीलता सबसे बड़ा गुण होता है। सहनशील व विनम्र हुए बिना हम सेवा भाव को अपने जीवन व आचरण में विकसित नहीं कर सकते। सेवा भाव से परिपूर्ण होकर ही हम अन्य लोगों के सामने मिसाल कामय कर सकते हैं, जिससे पूरे समाज को उत्थान व तरक्की के मार्ग पर सामूहिक रूप से आगे बढ़ाया जा सके। सेवा व्यवहार ही मनुष्य की पहचान बनाता है और उसकी नि:स्वार्थ भावना को चमकाता है।
सेवा मानव की ऐसी सर्वोत्तम भावना है, जो मानव को सच्चा मानव बनाती है। मानवता के प्रति प्रेम को किसी देश, जाति या धर्म की संकुचित परिधि में नहीं बांधा जा सकता। जिस व्यक्ति के मन में ममता,करुणा की भावना हो,वह अपना समस्त जीवन मानव सेवा में अर्पित कर देता है। ठीक इसी भाव से हम सबको अपना जीवन समाज हित में आगे बढ़ाना चाहिए। सेवा भाव मनुष्यों के साथ ही पेड़-पौधों व जीव-जंतुओं के प्रति रखते हुए हम इसे वृहद स्तर पर जनोपयोगी बना सकते हैं। सेवा भाव अतुलनीय संपदा है जिसे लगातार सचित करना हम सभी की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है,सेवा करने का अपना अलग आनंद होता है, एक बार सेवा करने की आदत पड़ जाती है तो फिर छूटती ही नहीं। जैसे कि हम बचपन में सुना या पढ़ा करते हैं कि सेवा सभी धर्मों का मूल है,अगर हम सेवा नहीं कर सकते तो हमारा यह मानव जीवन निरर्थक है। सेवा भाव के जरिए हम समाज को नई दिशा दे सकते हैं। असल में हमारा सेवा भाव ही हमारे जीवन में कामयाबी की असल नींव रखता है। सेवा भाव को अपने हृदय के भीतर विकसित करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, सामाजिक स्तर पर भी सभी को इस ओर लगातार प्रयास करने चाहिए, जिससे देश व समाज का भला हो सके।
