यामिनी चन्द्राकर/ छुरा:-किसी भी समाज के विकास का सीधा सम्बन्ध उस समाज की महिलाओं के विकास से जुड़ा होता है,महिलाओं के विकास के बिना व्यक्ति, परिवार और समाज के विकास की कल्पना भी नही की जा सकती है,महिलाओं के विकास के लिए छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ एक महत्वाकांक्षी योजना हैं। ‘‘बिहान’’ योजना महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने की एक अनूठी पहल है। इस योजना से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों को कौशल विकास उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिससे महिलाएं स्वरोजगार प्राप्त कर आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। ‘‘बिहान’’ योजना से जुड़ने वाली महिला स्व-सहायता समूह को आर्थिक रूप से सशक्त बनानें के लिए जिला प्रशासन द्वारा भी भरपूर सहयोग किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें एक निश्चित प्लेटफाॅर्म उपलब्ध कराया जाता है,ताकि वे अपने निर्मित सामग्रियों को आसानी से बिक्री कर सकें। सांथ ही छत्तीसगढ़ सरकार गरीब महिलाओं को आर्थिक रूप से संपन्ना करने के लिए गरीबी मूलक कार्य संचालित कर गांव गांव की स्व-सहायता समूहों को बिहान योजना से जोड़कर रोजगार मूलक कार्य उपलब्ध करा रही है। साथ ही रोजगार के लिए बैंक लोन के माध्यम से राशि उपलब्ध कराने में सहयोग कर रही है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जिले में संचालित ’बिहान’ योजना से महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम होने के साथ ही मुखरता के साथ सामाजिक जीवन में हिस्सा लेने के काबिल बन रही है।
बिहान योजना से प्रशिक्षण लेकर महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर
गरियाबंद जिला अंतर्गत विकास खण्ड छुरा में बीआरसी ग्रामीण उद्यमिता परियोजना बिहान छुरा में सुश्री रुचि शर्मा मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में बीपीएम SVEP एवम कुडंबश्री नेशनल रिसोर्स पर्सन मेंटर की सहायता से सात दिवस का चूड़ी एवम कंगन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे राष्ट्रीय 25 दीदियों शमिल हुई जिसमे 25 दीदी अलग अलग समूह ग्राम दादरगांव,चरोदा,कांसिंघी, बोर्रा बांधा,जनपद सदस्य खिलेस्वरी भी शामिल हुई समूह से जुड़ी महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना योजना का मुख्य उद्देश्य है सांथ महिलाओं को समूह से जोड़ना लक्ष्य है। ताकि ये महिलाएं समूह में रोजगार के लिए कुछ कार्य करके आर्थिक तंगी दूर कर सकें। सक्रिय महिलाओं को प्रशिक्षण में जोर दिया जा रहा है।मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री रुचि शर्मा इनदिनों महिला समूह के क्रियाकलापों पर विशेष नजर रखें हुये हैं शासन के विभिन्य वित्तीय योजनाओं के बारे में जानकारी दे रही है जिससे बैंकों से लोन लेकर आजीविका के साधन तैयार कर महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। समूह से जुड़ी महिलाओं को शासन के विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कौशल संबंधी विभिन्न हुनरमंद बनकर आत्मनिर्भर बनने रोजगार के कार्य शुरू करें,ताकि महिलाओं को रोजगार मिले। इस रुपये से महिलाएं अपना परिवार चला सके और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सके।

आज प्रशिक्षण के दौरा सुश्री रुचि शर्मा ने स्व सहायता समूह की महिलाओं को नियमित साप्ताहिक बैठक,बचत, आंतरिक लेन-देन,उधार वापसी, हिसाब-किताब संधारण,खुले में शौच मुक्त परिवार,सुनिश्चित परिवार,नशामुक्त परिवार,संपूर्ण टीकाकरण,सुपोषित परिवार,पंचायतीराज संस्थाओं के साथ समन्वय समेत 11 सूत्रों का पालन करने की भी सलाह दी गई।टीम ने महिलाओं के समूह बनाकर दो पाली में प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें रजिस्टर, ऋण पुस्तिका, व्यक्तिगत पास, लेजर रजिस्टर, मासिक प्रतिवेदन, तैयार करने की भी जानकारी दी।
क्या कहते हैं मुख्य कार्यपालन अधिकारी
सुश्री रूचि शर्मा सीईओ जनपद पंचायत छुरा से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि हमारे विकास खण्ड छुरा अन्तर्गत बिहान योजना से विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं जैसा कि अभी हमारी दीदियों के द्वारा ज्वेलरी डिजाइनिंग व चूड़ियों का निर्माण किया जा रहा हैं दीपावली के समय मटका दिये भी बनाये गए थे सांथ ही पूजा की टोकरी बनाई गई जिसमें पूजा में उपयोग होने बाली संपूर्ण सामग्री रखी होती हैं,सांथ ही दीदीयों के द्वारा कृषि कार्य भी किया जा रहा हैं क्षेत्र में चलती फिरती किराना व्यवसाय भी किया जा रहा हैं तो कुछ दीदियां बैंक सखी के रूप में काम भी कर रही हैं जंहा बैंक नही हैं वँहा दीदियां पहुंच कर ट्रांजेक्शन का काम कर रही हैं।कई दीदियां कपड़ा व्यवसाय से लेकर बड़ी किराना दुकान का भी संचालन कर रही हैं सांथ कई सार्वजनिक कार्यो में दीदियां बड़चड़कर हिस्सा लेती हैं महिलाएं स्व सहायता समूह के माध्यम से जुड़कर स्वयं का व्यवसाय कर रोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन रही हैं जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण की शुरुआत
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आठ मार्च,1975 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से मानी जाती हैं। फिर महिला सशक्तिकरण की पहल 1985 में महिला अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन नैरोबी में की गई। भारत सरकार ने समाज में लिंग आधारित भिन्नताओं को दूर करने के लिए एक महान नीति महिला कल्याण नीति 1953 में अपनाई थी।महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रीय उद्देश्य महिलाओं की प्रगति और उनमें आत्मविश्वास का संचार करना था। महिला सशक्तिकरण देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता हैं। महिलाओं का सशक्तिकरण सबसे महत्वपूर्ण चीज है क्योंकि महिलायें रचनाकार होती हैं।अगर आप उन्हें सशक्त करें,उन्हें शक्तिशाली बनाएं, प्रोत्साहित करें तो यह देश के लिए अच्छा है। ऐसा करना कोई बड़ी बात नहीं है,ऐसा सदियों से होता आया है। राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वर्ष 2001 को महिला सशक्तिकरण वर्ष घोषित किया था और महिलाओं को स्वशक्ति प्रदान करने की राष्ट्रीय नीति अपनाई थी। महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। ग्रामीण भारत की भूमिका को ध्यान में रखते हुए सरकार ने महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ पंचायती राज प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इससे कई महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में निर्वाचित होने का प्रोत्साहन मिला है जो उनके राजनीतिक सशक्तिकरण का संकेत है। राष्ट्रीय नीति का लक्ष्य महिलाओं की उन्नति,विकास और सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है।
उसके उद्देश्यों में महिलाओं के विकास के लिए सकारात्मक आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों के माध्यम से ऐसा अनुकूल माहौल तैयार करना है जिससे महिलाएं अपनी क्षमता को साकार कर सकें तथा स्वास्थ्य देखभाल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार, समान पारिश्रमिक एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठा सकें। भारत में कई महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण की राह में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं ने वाकई अच्छे काम कर रही है चाहे वो मनोरंजन का क्षेत्र हो या शिक्षा का क्षेत्र। ग्रामीण क्षेत्र में भी महिलाओं का योगदान अलग-अलग रहता है। हस्तशिल्प से संबंधित वस्तुओं के उत्पादन एवं विक्रय में महिलाओं ने परम्परागत रूप से सक्रिय योगदान दिया हैं।
