फिंगेश्वर ब्लाक के सरकडा में झोलाछाप डॉ खेमराज ध्रुव द्वारा, झाड़-फुक से इलाज कर नियमों की धाजिय्यां उड़ा रहा…

विभाग की सह पर चल रहा है झोलाछाप डॉक्टरों का अवैध कारोबार

परमेश्वर कुमार साहू ,गरियाबंद ,03 फरवरी 2021

.साहब का तो डाक्टरी बहाना है ,असल में कमाई तो नीबु ,नारियल और सिक्के से बीमारी का इलाज करने से मिलता है, जिससे थुंक लगाकर नोट गिनने को मिलता है।
एक ऐसा डाक्टर जो एलोपैथी व होम्योपैथी से इलाज तो करता है लेकिन उनके पास इलाज का करने एक और नया ज्ञान व पद्धति है जो सरकार के बड़े बड़े मेडिकल कालेज भी नहीं और न ही कोई बड़े से बड़े हॉस्पिटल में नहीं है। यहां तक न ही मेडिकल साइंस में आज तक इस तरह इलाज करने का फार्मूला आया है एक झोलाछाप डाक्टर के टेबल में इस तरह का एक इलाज करने का नया तरीका देखने को मिला ।जन्हा बड़े से बड़े बीमारियों को इलाज करने के लिए नीबू,नारियल और एक सिक्के की जरूरत पड़ती है फिर क्या है डाक्टर साहब पूरा बीमारी पकड़ लेता है और ठीक करने सौ प्रतिशत दावा करता है।

जी हां ये सच है और हम बात कर रहे है ब्लाक मुख्यालय फिगेश्वर से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम सरकड़ा में संचालित एक क्लीनिक का।जिसके संचालक खेमुराम ध्रुव है।जो डॉक्टरी की आड़ में तंत्र मंत्र कर लोगो में अंधविश्वास फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है।इनके पास न तो कोई परिसद से क्लीनिक चलाने का पंजीयन है और न ही विभाग से किसी भी प्रकार से परमिशन।
ग्राम सरकड़ा में कई सालो से अवैध रूप से क्लीनिक संचालित है लेकिन आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने कार्यवाही करना उचित नहीं समझा ।इसका मुख्य कारण यही है कि इन जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों द्वारा अवैध कार्यों में संलिप्त झोलाछाप डॉक्टरों को सरंक्षण दे रहे है।इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि प्रशासन की सह पर ही झोलाछाप डॉक्टरों का धंधा फल फूल रहा है।जिसके कारण चमचमाती गाडियां और बंगले देखने को मिलता है।ये झोलाछाप डाक्टर लाखो करोड़ों के बेनामी संपत्ति अवैध तरीके से अर्जित कर बादशाह बन गए है।
गौरतलब है कि शासन व उच्च विभाग द्वारा नर्सिंग होम एक्ट का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए है।लेकिन गरियाबंद जिले में सारे नियमों को खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।तो वहीं लापरवाह जिला प्रशासन की चुप्पी जिले के आम नागरिकों को समझ आ रही है।

जिले के फिंगेश्वर ब्लाक के सरकडा में झोलाछाप डाक्टर खेमचंद ध्रुव द्वारा जिस तरह से सारे नियमों को तार तार कर खुलेआम किलिनिक संचालन कर उसकी आड़ में झाड़ फूंक ,तंत्र मंत्र कर लोगो में व समाज में अंधविश्वास फैला रहा है ।
इससे तो साफ जाहिर है की उनके द्वारा काली कमाई का हिस्सा विभागीय अधिकारियों को भी पहुंच रहा है ।जिसके कारण प्रशासन इस तरह के झोलाछाप डॉक्टरों के अवैध कार्यों को लगाम लगाने बेबस नजर आ रहा है। यंहा तक उक्त झोलाछाप डाक्टर द्वारा अपने घर पर छुपा कर रख कर प्रतिबंधित दवाई भी मरीजों को दिया जा रहा है।
बताना लाजमी है की आज के आधुनिक परिवेश में उच्च शिक्षित लोग भी झोलाछाप डॉक्टर के तंत्र मंत्र के झांसे में है।यही वजह है कि बड़े बड़े घराने व अमीर लोग भी सरकडा के झोलाछाप डाक्टर के चक्रव्यूह के जाल में फन्स रहे है। उक्त कथित डाक्टर के क्लीनिक के बाहर दर्जनों मसॅडीज कारो को कतारबद्ध खड़े आसानी से देखा जा सकता है।इतनी भीड़ तो सरकार द्वारा दिए जा रहे निशुल्क चिकित्सालयों में भी देखने को नहीं मिलता।वहीं झोलाछाप डाक्टर अपने उस तंत्र मंत्र की विचित्र इलाज की पद्धति को अपने ज्ञान का इलाज कह रहे है ,तो क्या उस तंत्र मंत्र ज्ञान का शासन उसे सर्टिफिकेट देगा?क्या इसी तरह हमारे कितनो बरोजगार युवाओं के पास ज्ञान है क्या वे भी इसी झोलाछप डाक्टर का अनुकरण कर कानून अपने हाथ में ले ?अगर नींबू, नारियल और सिक्के व झाड़ फूंक से मरीजों के बिमारियों को पता कर ठीक किया जा सकता है तो क्या सरकार को अपने बड़े -बड़े चिकित्सालयों में एमबीबीएस डाक्टरों की जगह इन झोलाछाप डाक्टरों को बिठा दिया जाना चाहिए। क्योंकि ये झोलाछाप किसी विशेषज्ञ से कम नहीं है।वहीं जिले में कई निजी हस्पिटल नर्सिंग होम एक्ट की सरेआम धज्जी उड़ाते हुए शासन के नियमो को ठेंगा दिखा रहे हैं।लेकिन विभाग कम कुम्भकरणी निद्रा में सोए हुए है
अब ये भी बताना चाहेंगे कि इस खबर के बाद राजनीतिक व प्रशासनिक क्षेत्र में पकड़ बनाने वाले लोग खबर लिखने वाले पत्रकार व अख़बार संस्था पर दबाव बनाने से भी गुरेज नहीं करेंगे।लिहाजा अब देखना ये होगा की खबर के बाद शासन प्रशासन क्या कार्यवाही करते हैं।

वहीं इस संबंध में जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ नवरत्न ने बताया कि सभी बीएमओ को लिखित में झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही के लिए निर्देश किए है ।लेकिन उच्च अधिकारियों के निर्देश के बावजूद भी कार्यवाही न होना विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है