सिर्रीखुर्द – छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा एवं प्रकृति प्रेम के प्रतीक हरेली तिहार का आयोजन प्राथमिक शाला सिर्रीखुर्द में हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं को आत्मसात करते हुए हरेली पर्व की महत्ता को जाना।कार्यक्रम में बच्चों को हरेली तिहार के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी गई। बच्चों ने कृषि उपकरणों की पूजा, हरियाली के संरक्षण तथा प्रकृति के प्रति प्रेम एवं सम्मान का संदेश दिया। विद्यालय परिसर में पारंपरिक वातावरण के बीच बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।प्रभारी प्रधान पाठक एवं राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक खोमन लाल सिन्हा (गुरुजी) ने कहा कि हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी कृषि संस्कृति, प्रकृति प्रेम, लोकपरंपरा और सामाजिक एकता का गौरव है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।विद्यालय में मनाया गया हरेली तिहार बच्चों के लिए संस्कार, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की सीख से भरा यादगार अवसर बना। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोकपरंपराओं से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।
“हरियाली रहे, खुशहाली रहे, छत्तीसगढ़ की संस्कृति सदा निराली रहे।”
कार्यक्रम में सरपंच देवेंद्र वर्मा खोमन गुरुजी शिक्षिका धनेश्वरी सिन्हा नेमचंद साहू दिनेश निषाद द्रोपदी साहू सीता साहू लीलाराम मतावले छात्र-छात्राएं एवं ग्रामीण जन उपस्थित रहे।
